7 KM रेंज के दर्जनों गांवों में तेंदुए की दहशत:शाम होते ही घर बंद, रात में पहरा; लाठी-टॉर्च के साथ जाग रहे ग्रामीण


प्रयागराज के झूंसी में दर्जनों गांवों में पिछले एक सप्ताह से भय का माहौल है। रात के अंधेरे में एक तेंदुए की ने सैकड़ों परिवारों की नींद उड़ा दी है। 5 से 7 किलोमीटर के इलाके में फैले गांवों में बच्चे खेलना, पशु चराना और शाम की सैर सब कुछ डर के साए में आ गया है। सुरक्षा के नाम पर अब गांवों में रात्रि पहरे लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग समूह बनाकर चक्कर लगाते हैं, तो कहीं लाठी-डंडे और टॉर्च साथ रहती हैं। ग्रामीणों का मानना है कि अगर कोई अनहोनी हुई तो ऐसे सामूहिक पहरेबंदी से बचाव में मदद मिलेगी। 4 तस्वीरें देखिए… रात होते ही घरों में पहरा शाम ढलते ही घरों के दरवाजे-घरों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। लोग रात में बाहर निकलने से कतरा रहे हैं, कई जगहों पर शाम होते ही मोहल्ले पैक हो जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर लोग समूह बनाकर ही बाहर निकलते हैं और लकड़ी-डंडे साथ रखते हैं। कुछ परिवारों ने घरों के बाहर तखत बिछाकर समूह में ही सोना शुरू कर दिया ताकि अगर तेंदुआ आ भी जाए तो साथ मिलकर उसका सामना किया जा सके। बच्चों और पशुओं का डर सबसे बड़ा गांव वाले बताते हैं कि गर्मी में बिजली कटने पर बच्चे अक्सर छत या बाहर सोते हैं, वहीं मवेशी भी बाहर बंधे रहते हैं। इस वजह से लोगों को डर है कि तेंदुआ बच्चों या पशुओं को उठाकर ले जा सकता है। कई परिवारों ने रात में रोशनी के अतिरिक्त इंतजाम कर लिए हैं ताकि अंधेरे को कम किया जा सके और सुरक्षा बनी रहे। ​स्थानीय निवासी हिमांशु ने बताया कि उनका गांव गंगा नदी के किनारे स्थित है। इलाके में तेंदुए की हलचल की खबर मिलने के बाद से पूरे गांव में डर का माहौल है। लोग शाम 7 बजे से पहले ही अपने पालतू जानवरों (गाय, भैंस) को चारा-पानी खिलाकर और दूध निकालने का काम जल्दबाजी में निपटा रहे हैं। यदि किसी आपातकालीन स्थिति में रात को बाहर निकलना भी पड़ता है, तो लोग अकेले जाने से बच रहे हैं। ग्रामीण अब हाथ में टॉर्च और मजबूत लाठी लेकर ही समूह में बाहर कदम रख रहे हैं। ग्रामीण फूलचंद यादव बताते हैं कि उनका घर जंगल के पास है, जिससे गांव में काफी खौफ है। सुरक्षा के लिए उन्होंने बाड़ (बांस) लगाई है और लोग रात भर जागकर पहरा देते हैं। उन्हें डर है कि तेंदुआ पेड़ों पर चढ़ सकता है और सोते समय बच्चों या उन पर हमला कर सकता है। इसके अलावा, बछिया और पड़िया जैसे छोटे पालतू जानवरों को भी तेंदुए द्वारा उठाकर खा जाने का लगातार खतरा बना हुआ है। सुभाष का कहना है कि माहौल बहुत खराब है । शाम होने के बाद लोगों ने बाहर निकलना बिल्कुल बंद कर दिया है। जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, हम सभी को यही समझा रहे हैं कि बच्चों और बुजुर्गों को अकेले बाहर न भेजा जाए। छोटे बच्चों के लिए खतरा बहुत ज्यादा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। लखपत्ती देवी बताती हैं कि तेंदुए के खुले घूमने से दिन-रात डर बना रहता है। आस-पास चरी (चारा) बोई होने के कारण छोटे बच्चों और गाय-भैंसों की सुरक्षा को लेकर वे रात भर सो नहीं पाती हैं। झूंसी में फिर दिखा तेंदुआ झूंसी के हवेलिया वार्ड में मादा तेंदुआ और उसके दो शावक 13 जून को देर रात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए। इससे स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। झूंसी के वार्ड नं 52 हवेलिया क्षेत्र स्थित लक्कड़ बाबा मंदिर के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में एक मादा तेंदुआ और उसके दो शावक दिखाई देने की सूचना सामने आने के बाद इलाके में सतर्कता बढ़ा दी गई है। जिसके बाद से इलाके के अलग‑अलग हिस्सों में तेंदुए को कई बार देखा गया है। वहीं 16 जून को शास्त्री ब्रिज के नीचे एसटीपी प्लांट के पास एक बार फिर देखा गया। वहां काम करने वाले कर्मचारी ने तेंदुए का भागते हुए वीडियों भी बनाया। पहली बार धनैचा में दिखा था तेंदुआ प्रयागराज के गंगापार क्षेत्र में लगभग छह माह से ग्रामीणों के बीच दहशत का कारण बना तेंदुआ आखिरकार वन विभाग के लंबे अभियान के बाद पकड़ा गया था। यह तेंदुआ झूंसी, हनुमानगंज, मलखानपुर और आसपास के गांवों में कई बार देखा गया था। वन विभाग के अनुसार अगस्त 2025 में सबसे पहले हनुमानगंज क्षेत्र के मलखानपुर धनेचा गांव में तेंदुए के देखे जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद कई दिनों तक उसकी तलाश की गई। वन विभाग ने थर्मल ड्रोन, पिंजरे और विशेषज्ञ टीमों की मदद से खोज अभियान चलाया लेकिन तेंदुआ पकड़ में नहीं आया। 8 जनवरी को छिबैया में पकड़ा गया तेंदुए के कई बार गांवों के आसपास घूमने और लोगों तथा पशुओं पर हमला करने की घटनाएं सामने आईं। ग्रामीणों ने रात में घरों से निकलना कम कर दिया और खेतों में जाने से भी डरने लगे। वन विभाग ने कई स्थानों पर पिंजरे लगाए और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी। आठ जनवरी 2026 को हनुमानगंज क्षेत्र के छिबैया गांव में तेंदुआ एक घर में घुस गया। इससे पहले उसने दो ग्रामीणों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। घर के लोगों ने सूझबूझ दिखाते हुए कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और परिवार के अन्य सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला। सूचना मिलने पर वन विभाग, पुलिस और पीएसी की टीमें मौके पर पहुंचीं। करीब नौ से दस घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद तेंदुए को बेहोश कर सुरक्षित पकड़ लिया गया। छिबैयां से पकड़ा गया था एक तेंदुआ वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि छिबैयां में पकड़ा गया तेंदुआ पूर्ण विकसित नर था और उसकी उम्र लगभग सात से आठ वर्ष थी। लेकिन कुछ दिन बाद फिर हरीश चंद्र शोध संस्थान (एचआरआई) कैंपस में तेंदुआ के दिखने से लोग दहशत में रहे। एक बार तो वह निदेशक की गाड़ी के आगे कूद गया। वन विभाग के अनुसार यही तेंदुआ अगस्त 2025 से गंगापार के कई गांवों कोटवा, लीलापुर, सुदनीपुर, जमुनीपुर और बहादुरपुर क्षेत्र में घूम रहा था। लगभग छह महीने तक लोगों में दहशत फैलाने के बाद आठ जनवरी 2026 को झूंसी क्षेत्र के छिबैया गांव में एक घर में घुसने पर उसे सुरक्षित पकड़ लिया गया था। झूंसी इलाके में कब कब दिखा तेंदुआ

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