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महोबा जिले के पनवाड़ी ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सफाई और विकास कार्यों के नाम पर करीब 40 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के आरोप में ग्राम प्रधान संजय दुबे को उनके पद से हटा दिया गया है। जिलाधिकारी की जांच में दोषी पाए जाने के बाद उनकी वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियों पर तत्काल रोक लगा दी गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी चंद्र किशोर वर्मा की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में पाया गया कि सफाई और कूड़ा निस्तारण के नाम पर बिना किसी टेंडर या वैध दस्तावेजों के हर महीने 1 लाख 10 हजार रुपये एक ही व्यक्ति के नाम पर निकाले जा रहे थे। इतना ही नहीं, सफाई पर करीब 26 लाख रुपये खर्च दिखाए गए, लेकिन मौके पर न तो कोई रिकॉर्ड मिला और न ही आरआरसी सेंटर का सही उपयोग हुआ।
प्रशासनिक जांच में प्रधान द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों को भी सिरे से खारिज कर दिया गया। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने बिना कोरम पूरा किए और बिना हस्ताक्षर के फर्जी बैठकें दिखाकर सरकारी धन का आहरण किया। नियमों को ताक पर रखकर बिना सक्षम अधिकारी की तकनीकी स्वीकृति के कार्य कराए गए।
जांच शुरू होने के बाद फर्जी तरीके से पुराने रजिस्टरों में हस्ताक्षर और निविदा प्रपत्र तैयार करने की कोशिश की गई। ग्राम पंचायत सदस्यों को मिलने वाले बैठक मानदेय का भी कोई भुगतान नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बैठकें केवल कागजों पर ही निपटा दी गईं। जिलाधिकारी के आदेश पर उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1947 के तहत प्रधान को बर्खास्त किया गया है। अब गांव के विकास की कमान एक तीन सदस्यीय समिति के हाथों में होगी। ग्राम पंचायत के संचालन के लिए बनाई गई इस समिति में सुधांशु, आराधना और राजनारायण शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि सेकेंडरी जांच में आरोप पूरी तरह साबित होते हैं, तो न सिर्फ स्थायी बर्खास्तगी होगी, बल्कि गबन की गई पूरी राशि की रिकवरी भी संजय दुबे से की जाएगी।
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40 लाख की अनियमितता में ग्राम प्रधान संजय दुबे बर्खास्त:फर्जी खर्च, बिना टेंडर भुगतान और कागजी बैठकों का खुलासा; 3 सदस्यीय समिति संभालेगी जिम्मेदारी