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लखनऊ के बंथरा स्थित बालाजी वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर में 11 साल की अर्यमा शुक्ला ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर बिना पुस्तक देखे संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता का अखंड पाठ किया। उन्होंने शाम 5 बजे से 7:05 बजे तक लगातार 2 घंटे 5 मिनट में गीता का पाठ पूरा किया। अर्यमा को संस्कृत में संपूर्ण श्रीमद्भगवद्गीता और श्री दुर्गा सप्तशती के साथ कई सहस्रनाम और महामंत्र कंठस्थ हैं। वर्तमान में उन्हें 3000 से अधिक संस्कृत श्लोक याद हैं। खास बात यह है कि उन्होंने इसके लिए संस्कृत का कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया है। श्लोकों को याद रखने के साथ उच्चारण भी स्पष्ट है अर्यमा श्लोकों को केवल सुनकर याद कर लेती हैं। उनके परिवार में भी कोई संस्कृत भाषा का जानकार नहीं है। इसके बावजूद जटिल संस्कृत श्लोकों को याद रखने के साथ उनका उच्चारण भी स्पष्ट और प्रभावी है। आध्यात्मिक रुचि के साथ अर्यमा पढ़ाई में भी मेधावी हैं। वह लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल की अलीगंज शाखा में कक्षा 6 की छात्रा हैं और कक्षा में प्रथम आती हैं। उन्हें अंग्रेजी के साथ विज्ञान और अंतरिक्ष में भी खास रुचि है। वह आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भी आगे बढ़ना चाहती हैं। पॉकेट मनी से बांटीं गीता की प्रतियां अर्यमा विशेष अवसरों और अपने जन्मदिन 18 जुलाई पर कुछ अलग करने का प्रयास करती हैं। वह वृद्धाश्रमों में जाकर बुजुर्गों को मंत्र सुनाती हैं और उनका आशीर्वाद लेती हैं।वह अपनी पॉकेट मनी से अब तक श्रीमद्भगवद्गीता और दुर्गा सप्तशती की 2300 से अधिक प्रतियां लोगों को वितरित कर चुकी हैं। अर्यमा के लिए गीता सिर्फ धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। उनका मानना है कि अगर आइंस्टीन और ओपेनहाइमर जैसी हस्तियों को गीता से ज्ञान मिला, तो इसमें पूरी मानवता के लिए कुछ सार्वभौमिक सीख जरूर है।अर्यमा भारत की आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने के साथ विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भी योगदान देना चाहती हैं। उनका मानना है कि भारत की आध्यात्मिक जड़ें उसके वैज्ञानिक भविष्य को मजबूत कर सकती हैं।
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11 साल की अर्यमा ने बिना देखे पढ़ी पूरी गीता:जन्माष्टमी पर लखनऊ के मंदिर में 2 घंटे 5 मिनट में किया पाठ, 3000 से ज्यादा श्लोक याद