सपा में संग्राम; कैंपियरगंज में जवाब देने उतरेंगे साधू यादव:खुद को भावी प्रत्याशी घोषित किया; कल रोड शो करेंगे; पोस्टर से स्थानीय नेता गायब


जिले के उत्तर में स्थित विधानसभा सीट कैंपियरगंज चुनाव से पहले सपा का अंदरूनी अखाड़ा बन चुका है। पहले यहां नवीन यादव ने जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष एवं अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ रोड शो करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की। वह यह दावा कर रहे हैं कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने उन्हें चुनाव लड़ने को कहा है। जिलाध्यक्ष इसकी पुष्टि कर रहे हैं लेकिन वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय सपा के नेता साधू यादव यह बात मानने को तैयार नहीं। अब वह नवीन यादव और स्थानीय जिला संगठन को जवाब देने उतर रहे हैं। 6 सितंबर को विशाल रोड शो करेंगे। जो पोस्टर उनकी ओर से जारी किया गया है, उसमें उन्होंने खुद को भविष्य के प्रत्याशी के रूप में प्रस्तुत किया है। इस पोस्टर पर सपा का राष्ट्रीय व प्रदेश नेतृत्व तो नजर आ रहा है लेकिन जिला संगठन गायब है। साधू इस रोड शो के जरिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक यह संदेश पहुंचाना चाह रहे हैं कि उनकी स्थिति सबसे मजबूत है। लगभग 20 दिन पहले से कैंपियरगंज में सपा के भीतर खलबली मची है। साधू यादव ऐसे नेता हैं जो इसी क्षेत्र के निवासी हैं और पिछले कई वर्षों से सक्रिय हैं। 2005 में पार्टी ने उनकी पत्नी चिन्ता यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया था। 2012 में कैंपियरगंज विधानसभा के गठन के साथ उन्हें विधानसभा का टिकट दिया। 2017 में सपा व कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ाया। लेकिन, दोनों बार उन्हें हर का सामना करना पड़ा था। 2022 में उन्हें टिकट नहीं मिला। 2027 में वह पूरी तरह से टिकट को लेकर संतुष्ट थे लेकिन अचानक नवीन यादव का प्रचार शुरू हो गया। तभी से साधू के खेमे में बेचैनी है। रोड शो के जरिए नवीन ने की थी इंट्री नवीन सपा से काफी पहले से जुड़े हैं। उनके पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव व वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से संबंध हैं। कैंपियरगंज ऐसी सीट है, जहां से भाजपा के फतेहबहादुर सिंह 7 बार से विधायक हैं। उनके सामने अखिलेश मजबूत प्रत्याशी ढूंढ रहे हैं और इसी क्रम में उन्होंने 2022 में अभिनेत्री काजल निषाद को प्रत्याशी बनाया था। इस बार एक और प्रयोग करते हुए नवीन यादव को लेकर आ रहे हैं। चर्चा है कि आर्थिक पक्ष मजबूत करने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है। राष्ट्रीय नेतृत्व तक नहीं पहुंची साधू यादव की बात
जबसे नवीन यादव के नाम की चर्चा आयी है, साधू व उनके परिवार के लोग यह दावा कर रहे हैं कि राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिलकर कोई निर्णय लिया जाएगा। लेकिन धीरे-धीरे समय बीत रहा है और अभी तक उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात की कोई तस्वीर सामने नहीं आयी। सपा सूत्रों की मानें तो राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से अभी समय नहीं दिया गया है। इसलिए साधू यादव अपनी बात नहीं पहुंचा पाए हैं। दूसरी ओर पार्टी के भीतर ही एक और चर्चा है कि सपा प्रमुख अब अपने निर्णय में बदलाव के मूड में नहीं हैं। इसका भान होने के कारण ही अब दूसरे रास्ते पर चलकर यानी जमीन पर ताकत दिखाकर साधू अपना संदेश पार्टी हाईकमान तक पहुंचाने के प्रयास में हैं। रोड शो के जरिए पूरे विधानसभा को कवर करने की योजना साधू यादव ने रोड शो के जरिए पूरी विधानसभा को कवर करने की योजना बनाई है। रोड शो बायपास रोड भगवानपुर से शुरू होगा। पीपीगंज बाजार, जंगल कौड़िया, जीरो प्वाइंट, शेरपुर, चमराह टोल टैक्स, भंडारो सर्विस रोड, डोहरिया बाजार, सिंहोरवा चौराहा, मीरपुर, तुरकौलिया, जसवल बाजार, मंगरू चौराहा, जनकपुर होते हुए कैंपियरगंज पहुंचेगा। यहां साधू यादव के कार्यालय पर समाप्त होगा।
साधू यादव के एक समर्थक का दावा है कि नवीन यादव के रोड शो पर साधू भैया का रोड शो भारी पड़ेगा। साधू यादव के स्लोगन से उनके अगले कदम की आहट वरिष्ठ पत्रकार डीबीबी मिश्र कहते हैं कि साधू यादव ने अपने रोड शो के पोस्टर में पार्टी से ज्यादा जनता को तवज्जो दी है। पार्टी हाईकमान के नेताओं की फोटो तो अभी लगी है लेकिन स्थानीय पदाधिकारियों को बगावती तेवर दिखाते हुए उनके फोटो गायब रखे गए हैं। साधू के पोस्टर पर दर्ज स्लोगन ‘आपका अपना साथी, आपका अपना उम्मीदवार’ इस ओर इशारा करता है कि साधू इस बात से आहत हैं कि अब तक उन्हें पार्टी से कोई ठोस या मनचाहा आश्वासन नहीं मिला। इसीलिए उन्होंने अपने पोस्टर में अपने समर्थकों और जनता पर सबकुछ छोड़ा है। खुद को भविष्य के प्रत्याशी के रूप में भी प्रस्तुत किया है। निश्चित ही यह उनके अगले कदम की आहट है। यानी उनकी मंशा को दर्शाता है कि वह चुनाव लड़ने के मूड में हैं। साधू का यह रोड शो बहुत कुछ तय करेगा। यदि प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहें तो अपनी बात मनवा भी सकते हैं। चुनावों में साधू यादव के परिवार की स्थिति जानिए कैंपियरगंज में अब तक साधू यादव ने अपनी पत्नी चिन्ता यादव को ही मैदान में उतारा है। 2012 में जब यह विधानसभा अस्तित्व में आयी तो पहली प्रत्याशी के रूप में चिंता यादव चुनाव लड़ीं। वह जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी थीं। उन्हें 62 हजार 948 वोट मिले थे। फतेहबहादुर सिंह इस चुनाव में एनसीपी के टिकट पर मैदान में थे। एनसीपी का यहां कोई खास जनाधार नहीं है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने 71 हजार 906 वोट पाकर जीत हासिल की। जीत का अंतर 8 हजार 757 वोटों का था। इस चुनाव में भाजपा के बृजेश यादव को 14 हजार 800 वोट मिले थे।
2017 के चुनाव में चिंता यादव सपा व कांग्रेस के गठबंधन से चुनाव मैदान में उतरीं थीं। उन्हें टिकट कांग्रेस से मिला था। इस चुनाव में फतेहबहादुर सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। चिंता को 58 हजार 782 वोट मिले तो फतेहबहादुर सिंह को 91 हजार 636 वोट मिले थे। जीत का अंतर 32 हजार 854 हो गया।
2022 के चुनाव में सपा ने यहां से प्रत्याशी बदल दिया। काजल निषाद को मैदान में उतारा गया। काजल को 79 हजार 376 वोट मिले। जबकि फतेहबहादुर सिंह को इस बार 1 लाख 22 हजार 32 वोट मिले। जीत का अंतर 42 हजार 656 वोट हो गया। जानिए विधानसभा का जातिगत समीकरण कैंपियरगंज में लगभग 1 लाख निषाद वोटर हैं। लगभग 60 हजार यादव, 32000 सैंथवार/कुर्मी, 40 हजार ब्राह्मण, 19 हजार वैश्य, ठाकुर 5 हजार, एससी 40 हजार, मुस्लिम 15 हजार, लगभग 10 हजार अन्य पिछड़ा वर्ग। यहां लगातार फतेहबहादुर सिंह जीत दर्ज करते आ रहे हैं। सपा यहां जमीन तलाश रही है। सपा की ओर से निषाद प्रत्याशी भी मैदान में उतारा जा चुका है लेकिन जीत नहीं मिली।

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