स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कन्नौज में चौराहे पर बिताई रात:बोले- प्रशासन ने स्कूल मालिक को धमकाकर रात्रि विश्राम से रोका, हमें परेशान किया जा रहा


कन्नौज में गोविष्टी यात्रा लेकर पहुंचे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को चौराहे पर रात बितानी पड़ी। जिस स्कूल में उनके रात्रि विश्राम का कार्यक्रम था, उसमें प्रशासन ने उन्हें ठहराने से मना कर दिया। आरोप है कि स्कूल मालिक को धमकाकर स्कूल में ठहराने से मना कर दिया गया। जिसके बाद शंकराचार्य ने अपने अनुयायियों के साथ पाल चौराहे पर ही स्वागत में लगे टेंट में रात बिताई। उन्होंने कहा कि हमें जगह-जगह परेशान किया जा रहा है। लेकिन हम अपनी यात्रा पूरी करेंगे। 150 विधानसभाओं में हम होकर आ चुके हैं। गोमाता को राष्ट्रमाता का दर्जा देने के लिए निकले हैं। रात्रि विश्राम के दौरान उनके टेंट के बाहर पुलिस फोर्स रात भर तैनात रहा। सुबह 8 बजे शंकराचार्य छिबरामऊ के लिए रवाना हो गए। मौके की तस्वीरें देखिए
वह बुधवार शाम 7 बजे कन्नौज पहुंचे थे। यहां अनुयायियों को सम्बोधित करते समय उन्हें सूचना मिली कि छिबरामऊ में जहां उन्हें रुकना था, अचानक से वहां के आयोजक ने प्रशासन के दबाव में कार्यक्रम स्थगित कर दिया। ऐसे में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पाल चौराहे पर ही एक साइड में खुली जगह पर डेरा जमा लिया और रात वहीं काटने का निर्णय लिया। हालांकि डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने उनके कार्यक्रम में किसी तरह का कोई दबाव न होने की बात कही है। उन्होंने कहाकि शंकराचार्य को न रोका गया है और न ही कोई रोकेगा। शंकराचार्य की अगवानी में जुटे रहे सपाई और कांग्रेसी-
शहर के पाल चौराहे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के पहुंचने पर सपा और कांग्रेस नेताओं ने उनकी अगवानी की। स्वागत कर उन्हें रोड किनारे लगे टेंट में ले गए। जहां उन्होंने 45 मिनट का समय बिताया। उसके बाद यात्रा छिबरामऊ की ओर रवाना होनी थी, लेकिन तभी शंकराचार्य को सूचना मिली कि छिबरामऊ में उन्हें जहां रुकना था, वहां के आयोजक को प्रशासन से कार्यवाही की धमकी मिली है, जिस कारण से उन्होंने शंकराचार्य के रुकने की व्यवस्था को स्थगित कर दिया। ऐसे में उन्होंने रात के यात्रा को आगे बढाने की बजाय, शहर के पाल चौराहे पर ही रोकने का फैसला किया और सड़क किनारे पड़ी खाली जगह पर तख्त के ऊपर बैठ गए। उनकी सुरक्षा में पुलिस फोर्स भी पाल चौराहे पर रात भर डटा रहा। न बिजली, न पंखा
पाल चौराहे पर रात के वक्त शंकराचार्य ने अचानक से रुकने का फैसला किया। ऐसे में वहां न बिजली की व्यवस्था थी और न ही पंखों की। ऐसे में भीषण गर्मी से उन्हें बचाने के लिए उनके सेवादार काफी देर तक हाथ वाले पंखों से उन पर हवा करते रहे। मच्छरों से भी उन लोगों को जूझना पड़ा। यहां स्ट्रीट लाइट की रोशनी में ही सभी ने रात बिताई। आयोजक बोले, तकनीकि समस्या के कारण टाला कार्यक्रम-
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को छिबरामऊ स्थित एक स्कूल में रात को रुकना था, लेकिन अचानक से प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद छिबरामऊ में उन्हें रोकने का कार्यक्रम टाल दिया गया। इस मामले को लेकर स्कूल संचालक का कहना है कि शंकराचार्य के आने से कुछ पहले ही प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। कुछ तकनीकि समस्या होने पर कार्यक्रम को निरस्त करना पड़ा।

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा गुरुवार सुबह 8 बजे कन्नौज के पाल चौराहे से छिबरामऊ के लिए रवाना हुई। उन्होंने बुधवार रात पाल चौराहे पर ही बिताई थी। शंकराचार्य बुधवार शाम 7 बजे कन्नौज पहुंचे थे। यहां अनुयायियों को संबोधित करते समय उन्हें जानकारी मिली कि छिबरामऊ में उनके रुकने का कार्यक्रम अचानक स्थगित कर दिया गया है। आयोजकों ने इसके पीछे प्रशासन के दबाव का हवाला दिया था। कार्यक्रम रद्द होने के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पाल चौराहे पर ही एक खुली जगह पर डेरा डाल लिया। उन्होंने वहीं रात बिताने का निर्णय लिया। इस संबंध में जिलाधिकारी (डीएम) आशुतोष मोहन अग्निहोत्री ने किसी भी तरह के प्रशासनिक दबाव से इनकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य को न तो रोका गया है और न ही कोई रोकेगा।

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