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सुल्तानपुर शहर के खैराबाद स्थित इमामबाड़ा बेगम हुसैन अकबर में रविवार रात एक मजलिस का आयोजन किया गया। इस मजलिस को आजमगढ़ से आए मौलाना मेराज खां ने संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सच्चा मुजाहिद वही है जो अपने दिल की पैरवी न करे। मौलाना मेराज ने स्पष्ट किया कि बेगुनाहों पर तलवार चलाने वालों को जिहाद नहीं कहते। उनके अनुसार, ‘मुजाहिदे अकबर’ वह व्यक्ति है जो अपने दिल की इच्छाओं का पालन न करे। उन्होंने यह भी बताया कि जब पाप करते-करते दिल में काई जम जाती है, तो व्यक्ति को अच्छी बातें भी समझ नहीं आतीं। उन्होंने हजरत नूह नबी का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने 950 साल तक तबलीग (धर्म प्रचार) किया, लेकिन उनकी पत्नी और बेटा दोनों गुमराह रहे। मौलाना ने बताया कि यह कमी नूह नबी की नहीं थी, बल्कि उन दोनों की थी जिन्हें दुनियावी मोह ने जकड़ रखा था। मौलाना मेराज ने आगे कहा कि इस्लाम सिर्फ चौदह सौ साल पुराना नहीं है, बल्कि जब से हजरत आदम इस दुनिया में आए हैं, तब से इस्लाम इंसानियत का पैगाम दे रहा है। उन्होंने बताया कि मोहर्रम आ रहा है और हमें इमाम हुसैन के चरित्र से सीखना चाहिए, क्योंकि उनका चरित्र हमें बदलकर इंसान बना सकता है। उन्होंने इमाम हुसैन और हुर के प्रसंग का जिक्र किया। मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन ने कूफे से खत लिखकर अपने दोस्त हबीब इब्ने मजाहिर को बुलाया था, लेकिन कर्बला में मौजूद हुर को नहीं बुलाया। हुर ने स्वयं हुसैन को पहचान कर खुद को बदला, इसलिए आज जमाना हुर को याद कर रहा है। मौलाना ने मोहर्रम में आपसी विरोध खत्म कर हुसैनी बनकर एकता का संदेश देने का आह्वान किया। यह मजलिस हाजी मुजाहिद अकबर करबलाई की याद में आयोजित की गई थी। इसमें शफाअत हुसैन ने सोजखानी की, जबकि नजर सुल्तानपुरी, अमन सुल्तानपुरी और शेर अली ने अपने कलाम पढ़े। ग्लोबल हुसैनी मिशन की ओर से आयोजित इस मजलिस में जाहिद अकबर, डॉ. जफर, आलम रिजवी, आसिम सज्जाद, शमीम हैदर और नसीम हुसैन सहित कई लोग मौजूद रहे।
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सुल्तानपुर में ग्लोबल हुसैनी ने कराया मजलिस का आयोजन:मौलाना मेराज आजमी बोले-सच्चा मुजाहिद वही जो अपने दिल की न सुने