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सीतापुर में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। पिसावां ब्लॉक की अर्थाना ग्राम पंचायत में बनी पानी की टंकी की सीढ़ियों और पंप हाउस की दीवार में दरारें दिखाई देने के बाद मामला सामने आया। आरोप है कि शिकायत के बाद कार्यदायी संस्था ने दरारों की तकनीकी जांच और ठोस मरम्मत कराने के बजाय उन पर पुट्टी और पेंट करा दिया। इससे ग्रामीणों में निर्माण की गुणवत्ता को लेकर नाराजगी है। सीढ़ियों के पास कंक्रीट में दिखी दरार स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों में पानी की टंकी की सीढ़ियों के पास कंक्रीट और दीवार के जोड़ वाले हिस्से में दरार दिखाई दे रही है। वहीं, पंप हाउस की दीवार पर भी लंबी महीन दरार नजर आ रही है। एक स्थान पर दरार अपेक्षाकृत अधिक खुली हुई दिखाई देती है। इसके बाद टंकी के निर्माण की मजबूती और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शुरुआती दौर में दरारें आने से ग्रामीण चिंतित ग्रामीणों का कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत तैयार की गई पानी की टंकी से गांव के लोगों को पेयजल उपलब्ध कराया जाना है। ऐसे में निर्माण के शुरुआती दौर में ही दरारें दिखाई देना चिंता का विषय है। टंकी की सीढ़ियों का इस्तेमाल कर्मचारियों और तकनीकी कर्मियों द्वारा किया जाता है। इसलिए इसकी सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराना जरूरी है। कार्यदायी संस्था बोली- टंकी पूरी तरह सही मामले में कार्यदायी संस्था एनसीसी के ब्लॉक इंचार्ज नागेश ने टंकी को पूरी तरह सही बताया है। हालांकि, शिकायत के बाद टंकी में जिन स्थानों पर दरारें दिखाई दी थीं, वहां पुट्टी और पेंट करा दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि केवल दरारों को पुट्टी और पेंट से ढक देने से निर्माण की वास्तविक स्थिति सामने नहीं आएगी। उनका कहना है कि यह कार्रवाई महज खानापूर्ति है। जल निगम ने कहा- दरारों को दुरुस्त कराया जल निगम के सहायक अभियंता एपी सिंह ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद टंकी में आई दरारों को दुरुस्त करा दिया गया है। हालांकि, अब सवाल यह है कि दरारें किन कारणों से आईं और क्या उनकी तकनीकी जांच भी कराई गई है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की है।
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सीतापुर में जल जीवन मिशन की पानी टंकी में दरारें:कार्यदायी संस्था ने पुट्टी-पेंट कराया, ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर सवाल उठाए