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सीतापुर की तीर्थ नगरी नैमिषारण्य में प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत नैमिषारण्य तीर्थ का कायाकल्प तेजी से किया जा रहा है। नैमिषारण्य कॉरिडोर के भव्य निर्माण के साथ क्षेत्र को धार्मिक और पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की कवायद चल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से नैमिषारण्य को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के प्रयासों के बीच यहां देश-विदेश और विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या भी बढ़ रही है। वहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि नैमिषारण्य में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों, अमावस्या, पूर्णिमा और अन्य पर्वों के दौरान यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में किसी श्रद्धालु के घायल होने या अचानक गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर तत्काल बेहतर उपचार मिलना चुनौती बन जाता है। लोगों के मुताबिक नैमिषारण्य में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है, लेकिन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण यहां सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। हड्डी से संबंधित चोट, गंभीर दुर्घटना या अन्य जटिल मामलों में मरीजों को करीब 35 किलोमीटर दूर सीतापुर जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ उपचार के लिए लखनऊ रेफर किए जाने की जरूरत पड़ सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नैमिषारण्य के विकास के लिए करोड़ों रुपये की परियोजनाएं संचालित हो रही हैं, तो स्वास्थ्य सेवाओं को भी विकास योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, पर्याप्त मेडिकल स्टाफ, पैथोलॉजी व अन्य जांच सुविधाएं तथा 24 घंटे आपातकालीन उपचार की व्यवस्था की मांग की गई है। लोगों ने प्रदेश सरकार से कॉरिडोर निर्माण के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को भी प्राथमिकता देने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि मजबूत चिकित्सा व्यवस्था विकसित होने से स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी बड़ी राहत मिलेगी और नैमिषारण्य का समग्र विकास पूरा होगा।
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सीतापुर के नैमिषारण्य में करोड़ों की विकास परियोजनाएं:लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं अधूरी; 35 किमी दूर जाना पड़ता है जिला अस्पताल