सावन के दूसरे सोमवार पर शिवमय हुई नाथ नगरी:प्राचीन त्रिवटीनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, तीन वट वृक्षों की जड़ के बीच से प्रकट हुआ शिवलिंग


आज सावन का दूसरा सोमवार है और नाथ नगरी बरेली पूरी तरह शिवमय नजर आ रही है। शहर के प्राचीन शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। प्रेमनगर स्थित बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में भी भोलेनाथ के जलाभिषेक और दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे हैं। मंदिर परिसर से लेकर आसपास की सड़कों तक हर तरफ हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारे गूंज रहे हैं। रात 2 बजे से शुरू हो गया श्रद्धालुओं का पहुंचना
सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा त्रिवटीनाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का पहुंचना रात से ही शुरू हो गया था। सुबह होते-होते मंदिर के बाहर लंबी कतार लग गई। करीब आधा किलोमीटर तक श्रद्धालु लाइन में खड़े नजर आए। कोई हाथ में गंगाजल लेकर पहुंचा है तो कोई दूध और पूजा सामग्री के साथ बाबा का अभिषेक करने के इंतजार में है। श्रद्धालु कतार में अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इसके बावजूद लोगों में उत्साह कम नहीं है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। मंदिर के आसपास का माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है। तीन वट वृक्षों के बीच प्रकट हुए थे शिवलिंग
बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर की पहचान उसकी प्राचीन प्राकट्य कथा से भी जुड़ी है। मान्यता है कि सदियों पहले यहां घना जंगल हुआ करता था। इसी स्थान पर तीन वट वृक्ष थे। इन्हीं तीन वट वृक्षों के बीच भगवान शिव का शिवलिंग प्रकट हुआ था। इसी वजह से इसका नाम त्रिवटीनाथ पड़ा। मंदिर से जुड़ी एक अन्य मान्यता के अनुसार, वर्ष 1474 के आसपास एक चरवाहे को स्वप्न में भगवान शिव ने इस स्थान पर शिवलिंग होने की जानकारी दी थी। इसके बाद बताए गए स्थान पर खुदाई की गई तो शिवलिंग मिलने की बात कही जाती है। धीरे-धीरे यह स्थान श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बन गया। मंदिर की अपनी वेबसाइट भी इसे विक्रम संवत 1474 से जुड़ा करीब 600 वर्ष पुराना शैव तीर्थस्थल बताती है। संत जानकी दास ने मंदिर निर्माण की नींव रखी
समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। मंदिर से जुड़ी प्रचलित जानकारी के मुताबिक करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले संत बाबा जानकी दास यहां आए थे। उन्होंने शिवलिंग के पास झोपड़ी बनाकर साधना शुरू की। उनके सानिध्य में यहां पूजा-पाठ और हवन होने लगा।
बाद में श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था को देखते हुए मंदिर निर्माण का प्रयास शुरू हुआ। मंदिर कमेटी और ट्रस्ट के माध्यम से यहां धार्मिक गतिविधियां लगातार आगे बढ़ती गईं। आज बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर बरेली के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। सावन में लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं
सावन का महीना बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर के लिए खास माना जाता है। पूरे महीने श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। सोमवार के दिन भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। दूर-दराज के इलाकों से भी शिव भक्त यहां पहुंचते हैं और बाबा का जलाभिषेक करते हैं।
मंदिर के गर्भगृह में स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालु लंबी कतार में खड़े हैं। जलाभिषेक के साथ लोग भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना कर रहे हैं। कैमरे में कैद हो रही नाथ नगरी की भक्ति
सावन के दूसरे सोमवार पर त्रिवटीनाथ मंदिर का नजारा किसी भव्य धार्मिक आयोजन से कम नहीं है। कतार में खड़े श्रद्धालु, हाथों में पूजा की थालियां, गंगाजल और फूल लिए भक्त और मंदिर परिसर में गूंजते हर-हर महादेव के जयकारे आस्था की तस्वीर पेश कर रहे हैं। बरेली की पहचान नाथ नगरी के रूप में भी होती है। शहर में भगवान शिव के कई प्राचीन मंदिर हैं और सावन में इन सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है। त्रिवटीनाथ मंदिर भी इन्हीं प्रमुख आस्था केंद्रों में से एक है। आज सावन के दूसरे सोमवार पर बाबा त्रिवटीनाथ के दरबार में उमड़ी भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि आस्था के इस केंद्र से बरेली के लोगों का जुड़ाव कितना गहरा है। सुबह से लेकर दिनभर मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहेगा।

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