साफ होगा रामगढ़ताल का पानी:CM के निर्देश के बाद GDA ने शुरू की पहल


गोरखपुर एवं आसपास के जिलों के लोगों के लिए पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बन चुके रामगढ़ताल के पानी को साफ करने की पहल शुरू हो गई है। चिलुआताल के किनारे बने पिकनिक स्पॉट का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों तालों के पानी की तुलना की थी। उन्होंने चिलुआताल को ज्यादा साफ और प्राकृतिक बताया था। रामगढ़ताल को पहले से कहीं अधिक साफ करने को किए गए उपायों की तारीफ करते हुए उन्होंने इसे पूरी तरह से साफ करने का निर्देश दिया था। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलने के बाद गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल अपनी देखरेख में प्लान तैयार करा रहे हैं। जल्द ही इसके लिए इच्छुक फर्मों से आवेदन आमंत्रित किया जाएगा। ताल से बड़े पैमाने पर गाद निकालनी होीग। उसके बाद इसका पानी पूरी तरह से साफ हो सकेगा। गर्मी में पानी कम हो रहा
गर्मी के कारण रामगढ़ताल में पानी कम होने लगा है। हालांकि इसके बाद भी गहराई 4 मीटर से अधिक है। इस समय पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए ताल से जलनिकासी को बंद कर दिया जाएगा। हालांकि बरसात के समय ताल में पर्याप्त पानी हो जाता है। गाद सबसे बड़ी समस्या, दुर्गंध लोगों को परेशान करती है रामगढ़ताल में भरी लगभग 80 लाख घन मीटर से अधिक गाद सबसे बड़ी समस्या है। इसकी व्यापक डिसिल्टरिंग करने की जरूरत है। इसके साथ ही समय-समय पर उठने वाली दुर्गंध भी लोगों को परेशान करती है। सफाई के लिए जो फर्म चयनित की जाएगी, वह ताल में बढ़ती दुर्गंध, जल प्रदूषण, गाद जमाव और जल गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं के समाधान के लिए प्लान बनाएगी। प्राधिकरण की प्रस्तावित योजना के तहत सबसे पहले रामगढ़ताल का विस्तृत सर्वेक्षण कराया जाएगा। इसमें ताल की गहराई का मानचित्रण, वर्षों से जमा गाद की मात्रा और गुणवत्ता का परीक्षण, जल की गुणवत्ता की जांच तथा ताल में गिरने वाले नालों और अन्य प्रदूषण स्रोतों की पहचान की जाएगी। अध्ययन के दौरान यह भी पता लगाया जाएगा कि जल में दुर्गंध, जलकुंभी, शैवाल (काई) की अत्यधिक वृद्धि और पारदर्शिता में कमी के पीछे प्रमुख कारण क्या हैं। जल गुणवत्ता सुधारने के लिए कई आधुनिक और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग पर विचार किया जाएगा। दुर्गंध नियंत्रण के लिए जैविक उपचार, सूक्ष्मजीव आधारित तकनीक, बायो-एंजाइम, एरेशन सिस्टम (वायु मिश्रण प्रणाली), फाउंटेन (फव्वारा), नैनो बबल तकनीक, फ्लोटिंग वेटलैंड (तैरती आर्द्रभूमि) और फाइटो-रिमेडिएशन (पौधों के माध्यम से शोधन) जैसे विकल्पों का मूल्यांकन किया जाएगा। इसी प्रकार ताल में जमा गाद के प्रबंधन के लिए बायो-रिमेडिएशन (जैविक उपचार), ड्रेजिंग (तल की खुदाई), डी-सिल्टिंग (गाद निकासी) और जियो-ट्यूब तकनीक के उपयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। जल को साफ और पारदर्शी बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों के नियंत्रण, शैवाल प्रबंधन, कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड (निर्मित आर्द्रभूमि), फ्लोटिंग ट्रीटमेंट वेटलैंड (तैरती उपचार आर्द्रभूमि) और जल परिसंचरण प्रणाली विकसित करने पर भी जोर रहेगा। इसके अलावा रामगढ़ताल के कैचमेंट क्षेत्र (जलग्रहण क्षेत्र) को ध्यान में रखते हुए नालों के उपचार, सिल्ट ट्रैप (गाद अवरोधक) और संरक्षण क्षेत्र विकसित करने जैसे उपाय भी योजना में शामिल किए जाएंगे, ताकि भविष्य में प्रदूषण की समस्या दोबारा न बढ़े।
प्राधिकरण के मुख्य अभियंता किशन सिंह बताते हैं कि एजेंसियों से चरणबद्ध क्रियान्वयन, निगरानी व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन, पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन और दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव की स्पष्ट योजना प्रस्तुत करने को कहा जाएगा। जल गुणवत्ता, दुर्गंध में कमी और गाद प्रबंधन से जुड़े मानकों की नियमित निगरानी भी की जाएगी। GDA उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कहा कि रामगढ़ताल को और बेहतर बनाने के लिए प्लान तैयार किया गया है। इसके लिए जल्द ही एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट के जरिए इच्छुक फर्मों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। ताल को पूरी तरह से स्वच्छ बनाया जाएगा।

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