सहारनपुर में गर्भवती पत्नी की हत्या करने वाले को उम्रकैद:पत्नी की गला रेतकर की थी हत्या, कोर्ट ने सास-ससुर और जेठानी समेत को किया बरी


सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र में वर्ष 2018 में चार माह की गर्भवती पत्नी की हत्या के मामले में कोर्ट ने उसके पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, त्वरित न्यायालय प्रथम श्रेय शुक्ला की कोर्ट ने दोषी पति आशीष पर एक लाख रुपए का अर्थदंड भी लगाया। वहीं, मामले में आरोपी सास रामो उर्फ सुनीता, ससुर नरेश, जेठानी बबीता और जेठ सिकंदर को अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर दोषमुक्त कर दिया। एडीजीसी सतीश कुमार सैनी ने बताया कि गंगोह क्षेत्र निवासी संजय ने अपनी बेटी पिंकी की शादी मखदूमजहां निवासी आशीष के साथ की थी। वादी का कहना था कि शादी में करीब पांच लाख रुपए का दहेज और अन्य सामान दिया गया था। आरोप था कि शादी के बाद पिंकी को कम दहेज लाने को लेकर परेशान किया जाने लगा। ससुराल पक्ष की ओर से कथित तौर पर उस पर मायके से दो लाख रुपये और लाने का दबाव बनाया जा रहा था। चार माह की गर्भवती थी पिंकी परिजनों के मुताबिक, विवाद बढ़ने पर पिंकी को ससुराल से निकाल दिया गया था। उस समय वह चार माह की गर्भवती थी। 27 मई 2018 को परिवार और जिम्मेदार लोगों की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद पिंकी को समझाकर वापस ससुराल भेज दिया गया। अगले ही दिन 28 मई की सुबह करीब आठ बजे पिंकी के मायके वालों को पड़ोसियों से उसकी हत्या की सूचना मिली। बताया गया कि पिंकी का गला काटकर हत्या कर दी गई है। सूचना मिलने के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। मामले में गंगोह थाने में पति आशीष समेत ससुराल पक्ष के अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। कमरे और मुख्य गेट दोनों अंदर से थे बंद मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता सतीश सैनी ने अदालत में साक्ष्य और गवाह पेश किए। अभियोजन ने बताया कि जिस कमरे में पिंकी का शव मिला था, उसका दरवाजा अंदर से बंद था। इसके साथ ही घर का मुख्य गेट भी अंदर से बंद मिला था। एडीजीसी के अनुसार, पत्नी की हत्या के बाद आशीष ने खुद भी जान देने की कोशिश की थी। पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला। कोर्ट के समक्ष इस घटनाक्रम को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के तौर पर रखा गया। अभियोजन का तर्क था कि कमरे और मुख्य गेट के अंदर से बंद होने तथा पति के वहां मौजूद होने की परिस्थितियों में किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा हत्या किए जाने की संभावना नहीं थी। दहेज हत्या नहीं, हत्या का दोषी माना कोर्ट ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आशीष को पिंकी की हत्या का दोषी माना। हालांकि, कोर्ट ने मामले को दहेज हत्या के बजाय हत्या के मामले के रूप में माना। इसी आधार पर पति आशीष को आजीवन कारावास और एक लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं, सास रामो उर्फ सुनीता, ससुर नरेश, जेठानी बबीता और जेठ सिकंदर के खिलाफ आरोप साबित नहीं होने पर कोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया। इस तरह करीब आठ साल पुराने मामले में कोर्ट के फैसले के बाद हत्या के मामले में पति को सजा हुई, जबकि अन्य आरोपी बरी हो गए।

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