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सहारनपुर में पिलखनी स्थित राधा स्वामी सत्संग ब्यास में 1 और 2 सितंबर को होने वाले दो दिवसीय सत्संग को लेकर सहारनपुर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो और हजूर जगदीप सिंह गिल महाराज संगत को दर्शन देंगे और सत्संग के माध्यम से निहाल करेंगे। आयोजन में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, दिल्ली सहित उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। ट्रैफिक डायवर्जन 31 अगस्त की रात 8 बजे से 3 सितंबर की रात 10 बजे तक लागू रहेगा। इस दौरान सामान्य वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों से गुजारा जाएगा। हालांकि, पिलखनी स्थित सत्संग स्थल पर आने वाले वाहनों को डायवर्जन से छूट दी गई है। दोपहिया वाहनों के लिए भी कुछ मार्गों पर अलग व्यवस्था की गई है। आयोजन को लेकर सेवादारों ने भी कमान संभाल ली है। सत्संग भवन को चारों तरफ से सील कर दिया गया है और सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है। संगत का कार्यक्रम स्थल पर पहुंचना भी शुरू हो गया है। 7 हजार सेवादार संभालेंगे यातायात, 10 हजार की लंगर में ड्यूटी सत्संग के दौरान यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए करीब 7 हजार सेवादार तैनात किए गए हैं। वहीं लंगर व्यवस्था संभालने के लिए करीब 10 हजार सेवादार लगाए गए हैं। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से संगत को मेजर सेंटर तक पहुंचाने के लिए डेरे की बसों की भी व्यवस्था की गई है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। पंडाल में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं को मोबाइल फोन, कैमरा, टेपरिकॉर्डर समेत अन्य प्रतिबंधित सामान गेट पर बनाए गए काउंटर पर जमा कराना होगा। सामान जमा करने के बाद ही उन्हें पंडाल में प्रवेश दिया जाएगा। 1 सितंबर को सुबह 9:30 बजे शुरू होगा कार्यक्रम कार्यक्रम के अनुसार बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लो और हजूर जगदीप सिंह गिल महाराज 1 सितंबर की सुबह करीब 9:30 बजे पाठी पाठ करेंगे। इसके बाद सत्संग होगा। सत्संग के बाद बाबा जी बच्चों की ओर से पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देंगे। इसके पश्चात बाबा जी खुली कार में सवार होकर संगत को दर्शन देंगे। दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन को लेकर सेवादारों ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है। 31 अगस्त रात 8 बजे से 3 सितंबर रात 10 बजे तक डायवर्जन सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के कारण अंबाला रोड और आसपास के मार्गों पर यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए पुलिस ने करीब तीन दिनों तक रूट डायवर्जन लागू किया है। वहीं, सहारनपुर, सरसावा और आसपास के क्षेत्रों से गुजरने वाले वाहन चालकों को सफर शुरू करने से पहले अपना रूट तय करने की सलाह दी गई है। खासतौर पर यमुनानगर, अंबाला, देहरादून, हरिद्वार, मुजफ्फरनगर, मेरठ, देवबंद, शामली और सरसावा की ओर जाने वाले वाहन चालकों को डायवर्जन व्यवस्था का ध्यान रखना होगा। इन रास्तों पर बदलेगा ट्रैफिक -गागलहेड़ी की तरफ से आने वाले ऐसे वाहन जिन्हें यमुनानगर या अंबाला की ओर जाना है, उन्हें पिलखनी सत्संग के लिए आने वाले वाहनों को छोड़कर कोलकी कट बाईपास से निकाला जाएगा। -सरसावा बाईपास कट से शहर की तरफ आने वाले वाहनों के साथ नकुड़ तिराहा सरसावा और चिलकाना तिराहा सरसावा से आने वाले वाहनों को भी निर्धारित डायवर्जन के तहत संचालित किया जाएगा। -देहरादून, हरिद्वार या मुजफ्फरनगर की ओर जाने वाले वाहनों को सरसावा कट (बाबा का ढाबा कट) बाईपास का इस्तेमाल करना होगा। सत्संग में शामिल होने वाले वाहनों को इस व्यवस्था से छूट दी गई है। -इन स्थानों से यमुनानगर और अंबाला की ओर जाने वाले वाहनों को लाखनौर और कोलकी कट बाईपास के रास्ते भेजा जाएगा। पिलखनी सत्संग में आने वाले वाहन इस डायवर्जन से मुक्त रहेंगे। -सहारनपुर शहर से सरसावा की ओर जाने वाले सामान्य चार पहिया वाहनों का सीधा संचालन प्रभावित रहेगा। सत्संग में जाने वाले वाहनों और दोपहिया वाहनों को छोड़कर अन्य वाहनों को नकुड़ तिराहा से नकुड़-गंगोह रोड होते हुए कुम्हारहेड़ा बाईपास कट की ओर भेजा जाएगा। -शामली की ओर से आने वाले जिन वाहनों को मुजफ्फरनगर, देहरादून, अंबाला या सरसावा जाना है, उन्हें चुनहेटी कट बाईपास से निकाला जाएगा। सत्संग में आने वाले वाहनों को इस डायवर्जन से छूट रहेगी। -नकुड़ और गंगोह की तरफ से आने वाले जिन वाहनों को देहरादून या यमुनानगर जाना है, उन्हें कुम्हारहेड़ा कट बाईपास के रास्ते भेजा जाएगा। पिलखनी सत्संग के लिए आने वाले वाहनों पर यह व्यवस्था लागू नहीं होगी। 32 एक्सप्रेस ट्रेनों का सरसावा स्टेशन पर ठहराव दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे की ओर से भी विशेष व्यवस्था की गई है। 31 अगस्त से 2 सितंबर तक सरसावा रेलवे स्टेशन पर 32 ट्रेनों का अतिरिक्त ठहराव रखा गया है। इनमें छत्तीसगढ़ समेत विभिन्न राज्यों और प्रमुख शहरों से आने वाली ट्रेनें शामिल हैं। रेल मार्ग से सत्संग में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सरसावा स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव की व्यवस्था से काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। स्टेशन से संगत को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए डेरे की बसों की भी व्यवस्था की गई है। सत्संग स्थल पर सीसीटीवी से निगरानी आयोजन स्थल पर सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सेवादारों के मुताबिक सत्संग भवन को चारों ओर से सील कर दिया गया है। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है। पंडाल में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं के सामान की जांच होगी। मोबाइल, कैमरा, टेपरिकॉर्डर आदि सामान गेट पर बने काउंटर पर जमा करना होगा। इसके बाद ही श्रद्धालुओं को पंडाल में प्रवेश दिया जाएगा। दूसरे राज्यों से भी पहुंच रही संगत सत्संग में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अनुयायियों के पहुंचने की संभावना है। संगत का पहुंचना शुरू हो गया है। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ ही पुलिस और प्रशासन ने यातायात तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निगरानी और बढ़ा दी है। प्रशासन की कोशिश है कि सत्संग में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और दूसरी ओर सामान्य वाहन चालकों को भी जाम का सामना न करना पड़े। एसपी ट्रैफिक शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, डायवर्जन का उद्देश्य सत्संग के दौरान यातायात को व्यवस्थित बनाए रखना और आम वाहन चालकों को जाम की स्थिति से बचाना है। निर्धारित अवधि में सामान्य वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से ही संचालित किया जाएगा। उन्होंने वाहन चालकों से अपील की है कि 31 अगस्त की रात 8 बजे से 3 सितंबर की रात 10 बजे तक सफर करने से पहले अपने मार्ग की जानकारी जरूर कर लें और निर्धारित डायवर्जन का पालन करें। इससे यातायात व्यवस्था सुचारु रखने में पुलिस-प्रशासन को सहयोग मिलेगा।
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सहारनपुर के आज मेजर सेंटर आएंगे ढेरा प्रमुख बाबा गुरिंदर:राधा स्वामी सत्संग ब्यास का होगा दो दिवसीय कार्यक्रम, 3 दिन रहेगा ट्रैफिक डायवर्जन, 32 ट्रेनों का सरसावा स्टेशन पर ठहराव