ड्राइवर ने प्रॉपर्टी डीलर की हत्या कर गुमशुदगी लिखवाई:फोन ट्रेन में फेंक दिया था, ताकि लोकेशन भटके; मकान और 12 लाख का लालच था


लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलर और महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की अपहरण के बाद हत्या पूरी प्लानिंग के साथ की गई थी। धीरेंद्र (35) के ही ड्राइवर ने उनकी हत्या की और तुरंत थाने पहुंचकर गुमशुदगी दर्ज कराई। इतना ही नहीं, उसने धीरेंद्र का फोन ट्रेन में फेंक दिया था, ताकि लोकेशन भटकती रहे। फोन ट्रेन में फेंकने से पहले उसमें से खुद को और पत्नी को मैसेज भी किया कि मैं जा रहा हूं। न मुझे ढूंढ़ना और न किसी को लोकेशन बताना। प्रॉपर्टी डीलर धीरेंद्र का शव मिलने के बाद ड्राइवर रवि तिवारी ने पुलिस पूछताछ में ये सब राज खोले। उसने यह भी बताया कि किसी मोनू सिंह से वह संपर्क में था। धीरेंद्र की हत्या करने के बदले उसे लखनऊ में एक मकान, एक दुकान और 12 लाख रुपए कैश मिलना था। इसी लालच में पड़कर उसने धीरेंद्र के 10 साल के साथ और भरोसे को तोड़ दिया। धीरेंद्र को उस पर इतना भरोसा था कि वह उसके पास लाखों रुपए कैश भी छोड़ देते थे। बिजनेस की लगभग सारी बातें भी शेयर करते थे। पहले पूरा मामला जानिए- लखनऊ में 35 साल के प्रॉपर्टी डीलर धीरेंद्र प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रविवार शाम 5 बजे उनका शव जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर दुबग्गा में एक छोटी नहर से बरामद हुआ। उनके माथे और सीने पर गोली के निशान मिले। उन्नाव के रहने वाले धीरेंद्र महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष थे और प्रॉपर्टी व ट्रांसपोर्ट का काम करते थे। लखनऊ में PGI इलाके में रहते थे। पत्नी ने शनिवार को रिपोर्ट लिखाई थी। आरोप लगाया था कि ड्राइवर ने अपने साथियों के साथ मिलकर धीरेंद्र को अगवा कर लिया है। शुरुआती जांच में हत्या की वजह उन्नाव की करीब 50 करोड़ कीमती जमीन को लेकर विवाद सामने आया है। धीरेंद्र ने इसकी शिकायत सीएम योगी को लेटर लिखकर की थी। पुलिस ने ड्राइवर रवि तिवारी और उसके साथी ओमकार को हिरासत में लिया। ड्राइवर ने हत्या की बात कबूल की। हत्या में 4 लोग शामिल, 2 को पुलिस ढूंढ़ रही एडीसीपी दक्षिण रल्लापल्ली वसंथ कुमार के मुताबिक, जांच में अब तक चार लोगों के नाम सामने आए हैं। एक निलमथा का रहने वाला ड्राइवर रवि तिवारी, दूसरा खरगापुर का उसका परिचित ओमकार और दो अन्य लोग। रवि और ओमकार हिरासत में हैं। इनसे पूछताछ के आधार दो अन्य की तलाश की जा रही है। पूछताछ में पता चला कि चालक रवि तिवारी करीब 10 साल से धीरेंद्र प्रताप सिंह के यहां काम कर रहा था। वह उनका बेहद भरोसेमंद था। आरोप है कि साजिशकर्ताओं ने इसी भरोसे का फायदा उठाया और उसे लखनऊ में मकान-दुकान और 12 लाख कैश का लालच देकर हत्या की साजिश में शामिल कर लिया। एक गनर बीमार था, दूसरे को भी ड्यूटी पर आने से रोका धीरेंद्र प्रताप सिंह को उन्नाव पुलिस की ओर से दो गनर मिले थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शनिवार को इनमें से एक गनर बीमार होने के कारण ड्यूटी पर नहीं आया था। वहीं, दूसरे को रवि ने फोन कर उस दिन ड्यूटी पर आने से मना कर दिया था। एडीसीपी ने बताया कि दोनों गनर से ड्यूटी पर न आने के लिए उन्नाव पुलिस से जवाब मांगा है। पहले रूमाल सुंघाकर बेहोश किया फिर मारी गोली पुलिस पूछताछ में ड्राइवर ने बताया कि उसने पहले धीरेंद्र को रूमाल सुंघाकर बेहोश किया। इसके बाद सीने में दाहिनी तरफ गोली मार दी। गोली लगते ही वह झुके तो उनके सिर के पिछले हिस्से में भी एक गोली मार दी। यह वारदात उतरठिया के पास की गई। इसके बाद शव को फॉर्च्यूनर से 25 किमी दूर दुबग्गा क्षेत्र में किसान पथ के किनारे सुनसान स्थान पर ले गया। यहां सड़क से करीब 50 मीटर दूर शारदा सहायक नहर में शव फेंक दिया। बाद में धीरेंद्र की फॉर्च्यूनर को मेदांता अस्पताल के पास छोड़कर ओमकार के साथ फरार हो गया। कुछ ही घंटे में लखनऊ से अमेठी पहुंची लोकेशन धीरेंद्र के पास दो मोबाइल फोन थे। आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए इनमें से एक मोबाइल ट्रेन में फेंक दिया था। इससे उसकी लोकेशन लगातार बदलती रही और पुलिस को भ्रमित करने की कोशिश की गई। पुलिस ने मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की तो पहले गोसाईंगंज, हैदरगढ़ और अमेठी के जगदीशपुर में लोकेशन मिली। इसके बाद मोबाइल की आखिरी लोकेशन चंदौली में मिली। इससे पुलिस को शक हुआ कि मोबाइल को जानबूझकर दूसरी जगह ले जाया गया है। पत्नी ने दर्ज कराई थी अपहरण की शिकायत डीसीपी साउथ मुश्ताक ने बताया- धीरेंद्र की पत्नी ममता सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पति का ड्राइवर और उसके साथियों ने मिलकर अपहरण कर लिया है। इसके बाद संदेह के आधार पर ड्राइवर रवि तिवारी को हिरासत में पूछताछ के लिए लिया गया तो वह पुलिस को गुमराह करता रहा। कड़ाई से पूछताछ में उसने हत्या की बात कबूल की। उसकी निशानदेही पर दुबग्गा से शव बरामद किया गया। पूछताछ में सामने आया कि उन्नाव में एक जमीन का विवाद है, जिसके चलते यह पूरी साजिश रचकर घटना को अंजाम दिया गया। मामले में ड्राइवर सहित दो आरोपी हिरासत में हैं। पूर्व विधायक सेंगर का करीबी बताए जाते थे धीरेंद्र धीरेंद्र प्रताप सिंह को उन्नाव की बांगरमऊ विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रहे कुलदीप सिंह सेंगर का करीबी बताया जाता था। बताया गया है कि कुलदीप सिंह सेंगर के लखनऊ जिला जेल में बंद रहने के दौरान धीरेंद्र प्रताप सिंह अक्सर उनसे मिलने जेल पहुंचते थे। वह उनके मुकदमों की पैरवी भी करते थे। सोशल मीडिया पर धीरेंद्र प्रताप सिंह की भाजपा के कई बड़े नेताओं के साथ तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं। हिंदू युवा वाहिनी के नेता की हत्या की अफवाह फैली महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या के बाद उनके हमनाम हिंदू युवा वाहिनी के नेता धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या की अफवाह सोशल मीडिया पर फैल गई। इसके बाद सैकड़ों लोगों ने हिंदू युवा वाहिनी के नेता को फोन करना शुरू कर दिया। उन्होंने सभी को अपने सकुशल होने की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने खुद के जीवित और सकुशल होने का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। —————————— संबंधित खबर भी पढ़िए- लखनऊ में प्रॉपर्टी डीलर की हत्या, नहर में फेंकी लाश : ड्राइवर ने अगवा कर फॉर्च्यूनर में माथे-सीने पर गोली मारी, 50 करोड़ की जमीन का विवाद था लखनऊ में 35 साल के प्रॉपर्टी डीलर धीरेंद्र प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रविवार शाम 5 बजे उनका शव जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर दुबग्गा में एक छोटी नहर से बरामद हुआ। उनके माथे और सीने पर गोली के निशान मिले। उन्नाव के रहने वाले धीरेंद्र महाराणा प्रताप चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष थे और प्रॉपर्टी व ट्रांसपोर्ट का काम करते थे। लखनऊ में PGI इलाके में रहते थे। पत्नी ने शनिवार को रिपोर्ट लिखाई थी। आरोप लगाया था कि ड्राइवर ने अपने साथियों के साथ मिलकर धीरेंद्र को अगवा कर लिया है। (पूरी खबर पढ़िए)

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