![]()
सरयू का जलस्तर बुधवार को सुबह खतरे के निशान से 37 सेमी ऊपर पहुंच गया है। नदी का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाके में बाढ़ का पानी भर गया है। केंद्रीय जल आयोग के स्थानीय कार्यालय के अनुसार आज नदी का जलस्तर 93 मीटर 10 सेंटीमीटर मापा गया है।
सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है। संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर नावों की व्यवस्था, नाविकों की तैनाती, बाढ़ चौकियों का संचालन तथा प्रभावित लोगों के लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सरयू नदी का जलस्तर मंगलवार को 92.96 मीटर दर्ज किया गया, जबकि नदी का खतरे का निशान 92.73 मीटर है। इस प्रकार सरयू नदी खतरे के निशान से 23 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थीं। मानसून सत्र में यह पहला अवसर है जब नदी का जलस्तर इस स्तर तक पहुंचा है। जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि से टांडा तहसील के माझां क्षेत्र में दहशत और चिंता का माहौल बन गया है। सरयू का पानी अब मांझा क्षेत्र की कई बस्तियों के बेहद करीब पहुंच चुका है। मुबारकपुर गांव में नदी का पानी सड़क के नजदीक पहुंचने से ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। हालात को देखते हुए ग्रामीण सतर्क हो गए हैं और अपने परिवारों के साथ-साथ पशुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करने में जुट गए हैं। कई लोगों ने गाय, भैंस और अन्य मवेशियों को सुरक्षित स्थानों की ओर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। मांझा क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग पशुपालन और दुग्ध उत्पादन पर निर्भर हैं। जलस्तर बढ़ने से पशुओं के चारे और सुरक्षित ठिकानों की समस्या गंभीर होती जा रही है। इस क्षेत्र से नावों के माध्यम से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध टांडा कस्बे तक पहुंचाया जाता है। यदि जलस्तर और बढ़ा तो दुग्ध आपूर्ति व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का स्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। फिलहाल लोग नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कर रहे है। अयोध्या क्षेत्र में सरयू का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर पहुंचने की स्थिति मेंरुदौली तहसील में 9 संवेदनशील गांव और मजरे चिह्नित किए गए हैं। प्रशासन ने 3 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी हैं। कैथी मांझा समेत प्रभावित इलाकों में आवागमन के लिए नावों की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने जरूरत पड़ने पर कुल 5 नावें उपलब्ध रखने की तैयारी की है। बाढ़ के पानी से धान सहित किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं। फसल नुकसान का सर्वे शुरू कराया गया है।प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री की तैयारी है और पशुओं के लिए भूसे की व्यवस्था भी की गई है।
गांवों पर बढ़ता असर सरयू के बढ़ते पानी का सबसे ज्यादा असर नदी के किनारे और निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है। खेतों में पानी पहुंचने से धान और दूसरी फसलों को नुकसान का खतरा है। कई स्थानों पर ग्रामीणों के आवागमन के लिए नाव पर निर्भरता बढ़ रही है। 14 अगस्त की रिपोर्ट में रुदौली क्षेत्र में सरयू का जलस्तर 92.540 मीटर, खतरे के निशान 92.730 मीटर से केवल 19 सेंटीमीटर नीचे था और सलाहपुर, कैथी समेत आसपास के इलाकों में हजारों बीघे फसलें जलमग्न बताई गई थीं। वहीं 18 अगस्त की रिपोर्ट में प्रशासन ने कैथी मांझा सहित संवेदनशील गांवों का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव की तैयारियां तेज कर दी थीं।
Source link
सरयू खतरे के निशान 37 सेंटीमीटर ऊपर बह रही:निचले इलाके में फैला बाढ़ का पानी, प्रशासन अलर्ट मोड पर