![]()
लोकसभा चुनाव 2024 में संविधान और आरक्षण को लेकर बने विपक्ष के नैरेटिव के बाद भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव के लिए बेहद सतर्क रणनीति अपना रही है। पार्टी का फोकस अब उन दलित मतदाताओं पर है, जिन्हें लंबे समय से बसपा का कोर वोटर माना जाता है। इसी रणनीति के तहत 29 जुलाई से संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष पर समरसता संकल्प अभियान शुरू किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी शुरुआत वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से की। अभियान के तहत प्रदेशभर में समरसता कलश यात्रा निकाली जा रही है। संत रविदास की जन्मस्थली से लाई गई मिट्टी को 131 कलशों में रखकर विभिन्न मंदिरों, मंडलों और नगर निकायों के वार्डों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके माध्यम से दलित समाज से संवाद और जुड़ाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। भाजपा का मानना है कि संत रविदास को मानने वाले दलितों का बड़ा वर्ग बसपा का पारंपरिक समर्थक रहा है। इसी वर्ग तक पहुंच बनाने के लिए समरसता कलश यात्रा को हर मंडल और हर वार्ड तक ले जाया जा रहा है। यह समरसता संकल्प अभियान फरवरी 2027 तक चलेगा। इसी क्रम में भदोही का नाम दोबारा संत रविदास नगर किया गया है। दलित नेताओं को दी जा रही तवज्जो इस पूरी यात्रा में दलित कार्यकर्ताओं और नेताओं को तवज्जो दी जा रही है। गोरखपुर में भी यह यात्रा पूरे जिले में चल रही है। यात्रा के साथ जो कलश लेकर चल रहे हैं, उसमें संत रविदास के जन्मस्थली की मिट्टी है। हर मंडल एवं वार्ड में इसका भव्य स्वागत किया जा रहा है। स्वागत करने वालों में बड़ी संख्या दलित कार्यकर्ताओं की है। ये कार्यकर्ता दलित बस्तियों तक संदेश पहुंचा रहे हैं। कलश में रखी मिट्टी के जरिए दलित मतदाताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ा जा रहा है। इसके साथ ही संत रविदास के दोहे भी सुनाए जा रहे हैं। उसका अर्थ भी समझाया जा रहा है। गोरखपुर में इस अभियान का कोआर्डिनेटर भी अनुसूचित जाति के नेता को बनाया गया है। जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ वरिष्ठ पत्रकार आलोक दूबे कहते हैं कि लोकसभा चुनाव से भाजपा ने सीख ली है। दलित वर्ग में जो जातियां भाजपा के साथ मजबूती से खड़ी रहती थीं, उनमें से कुछ को तोड़ने में विपक्ष कामयाब रहा था। भाजपा उन्हें वापस लाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसके साथ ही संत रविदास को मानने वाले दलित वर्ग को भी साधा जा रहा है। दलित मतदाताओं में सबसे बड़ी संख्या इसी वर्ग की है। गोरखपुर व आसपास के जिलों की विधानसभा क्षेत्रों में इस वर्ग की संख्या अधिक है। लोकसभा चुनाव में बसपा के प्रत्याशियों को मिले वोट देख लें तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। गोरखपुर व बस्ती मंडल की सभी 9 लोकसभा सीटों पर कोई ऐसा प्रत्याशी नहीं था, जिसे व्यक्तिगत रूप से प्रभावशाली कहा जा सके लेकिन उन्हें ठीक-ठाक वोट मिले। संतकबीरनगर में तो बसपा के प्रत्याशी ने लगभग डेढ़ लाख वोट हासिल किए थे। ऐसे में सात महीने के इस अभियान से भाजपा इन मतदाताओं को अपने साथ लाने में जुटी है। इसमें से कुछ प्रतिशत वोट भी मिला तो पार्टी की स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी।
Source link
समरसता कलश यात्रा से दलित मतों को साध रही भाजपा:संत रविदास के सहारे 2027 की तैयारी, दलित मतदाताओं तक पहुंचने में जुटी भाजपा