संभल रोड पर गांगन नदी का वजूद खतरे में:गांगन नदी में बनी 1500 से ज्यादा अवैध फैक्ट्रियां; नदी सिकुड़कर नाले में तब्दील हुई


मुरादाबाद में गांगन नदी का वजूद खात्मे की कगार पर पहुंच चुका है। संभल रोड पर लाकड़ी बाईपास किनारे नदी के भीतर 1500 से अधिक अवैध फैक्ट्रियां बस चुकी हैं। इनमें से किसी का भी मानचित्र मुरादाबाद विकास प्राधिकरण से पास नहीं है। मानचित्र पास हो भी नहीं सकता, क्योंकि जिस जमीन पर फैक्ट्री बनी हैं वो नदी की सरकारी जमीन है और आसपास का एरिया ग्रीन बेल्ट घोषित है।
संभल रोड पर नया मुरादाबाद की सीमा तक तो फिर भी नदी का कुछ हिस्सा सुरक्षित है, लेकिन जैसे ही मझोला थाने के पास नदी पर बने पुल को क्रॉस करके लाकड़ी की तरफ बढ़ते हैं तो नदी एकदम नाले की शक्ल ले लेती है। यहां नदी की हजारों बीघा जमीन पर अवैध कब्जे करके कुछ निर्यातकों ने फैक्ट्रियां बना ली हैं। इन अवैध निर्मााणों को रोकने का जिम्मा मुरादाबाद विकास प्राधिकरण, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन का था। लेकिन किसी ने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। एनजीटी के बार-बार आदेश करने के बाद भी जिला प्रशासन गांगन नदी पर हुए अवैध कब्जों को नहीं रोक सका। इतना ही नहीं एनजीटी के आदेश पर भी ये अवैध कब्जे ढहाए नहीं जा सके, क्योंकि ये सभी अवैध कब्जे रसूखदार लोगों के हैं।
पहले देखिए गांगन नदी में अवैध कब्जों की तस्वीरें
मुद्दे से जुड़े मुख्य बिंदु: नियमों का उल्लंघन: नदियों की धारा से 74 मीटर की दूरी तक निर्माण प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, बड़े निर्यातकों ने मिट्टी डालकर नदी के हिस्से को पाटकर पक्के निर्माण कर लिए हैं। प्रदूषण की मार: इन अवैध फैक्ट्रियों और पीतल की इकाइयों का केमिकल युक्त पानी सीधे नदी में गिर रहा है, जिससे गांगन नदी बुरी तरह प्रदूषित हो रही है। विभागों की मिलीभगत: मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA), सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कथित मिलीभगत के कारण इन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अतिक्रमण पर सियासत: एनजीटी (NGT) के आदेशों के बाद भी अधिकारियों द्वारा कभी-कभार केवल औपचारिकता (नोटिस या सीलिंग) की जाती है। इन अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए प्रभावी कार्रवाई कभी नहीं की गई है।

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