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संभल कोतवाली क्षेत्र के शहजादी सराय स्थित प्राचीन क्षेमनाथ मंदिर (नैमिषारण्य तीर्थ) पर गुरुवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सावन महीने के दूसरे गुरुवार को दोपहर 12 बजे तक 50,000 से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। यह स्थान बाबा गुरु गोरखनाथ शिष्य परंपरा के बाबा क्षेमनाथ की समाधि स्थल है। गुरुवार की सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालुओं ने कुंड में स्नान करने के बाद बाबा क्षेमनाथ की समाधि के दर्शन किए। मंदिर परिसर में 50 से अधिक दुकानें लगी थीं और आठ भंडारों का आयोजन किया गया। यूपी के कई जिलों से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। भीड़ को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया था और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही थी। श्रद्धालु मोहनश्याम शर्मा ने बताया कि वह 25-30 सालों से यहां आ रहे हैं और यह एक प्राचीन सिद्धपीठ मंदिर है, जहां सावन में काफी उत्सव होता है। कुशल मदान व योगेश कुमार ने बताया कि बाबा की समाधि पर हर मन्नत पूरी होती है और हम बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ यहां आ रहे हैं। बड़ी-बड़ी दूर से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। नाथ संप्रदाय के महंत बाल योगी दीनानाथ ने बताया कि यह स्थान संभल की 24 कोसीय परिक्रमा के अंतर्गत आता है और इसे संभल का सबसे जागृत नैमिषारण्य तीर्थ माना जाता है। यहां सिद्ध शिरोमणि बाबा क्षेमनाथजी की सिद्ध समाधि है। महंत दीनानाथ के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि “संभल में बाबा क्षेमनाथ अवधूत, निर्धन को धंधे, बांझन को दे पूत।” जिन स्त्रियों को संतान नहीं होती, उनके लिए यहां विशेष महत्व है। मंदिर में मुंडन संस्कार भी होता है। बाबा क्षेमनाथ को धन के देवता और कुबेर देवता के अंशज माना जाता है।
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संभल में 50 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए:बाबा क्षेमनाथ की समाधि पर मेला, कुंड में स्नान किया, धन-पुत्र प्राप्ति की मान्यता