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संभल के सिरसी सादात में 12 मोहर्रम के अवसर पर मोहल्ला शर्की से परंपरागत जुलूस-ए-मेहंदी निकाला गया। इस जुलूस में ज़ुल्जनाह, अलम-ए-मुबारक, शबीह-ए-ताबूत और हज़रत अली असगर (अ.स.) का झूला शामिल था। हजारों की संख्या में अज़ादारों ने शिरकत कर शोहदाए कर्बला की याद ताज़ा की और उनके बलिदान को श्रद्धांजलि दी। जुलूस शाम 4 बजे मोहल्ला शर्की से शुरू हुआ और निर्धारित मार्गों से होते हुए रात 9 बजे दरगाह पर समाप्त हुआ। पूरे रास्ते अज़ादार ‘या हुसैन’ के नारों के साथ मातम करते हुए आगे बढ़े। इस दौरान आग का मातम, ज़ंजीर का मातम और सीनाज़नी की गई। कई अंजुमनों ने नौहे पेश किए, जिन पर अज़ादारों ने मातम कर इमाम हुसैन (अ.स.) और शोहदाए कर्बला को श्रद्धांजलि दी। दरगाह, मोहल्ला शर्की सादात पहुंचने पर 18 बनी हाशिम की प्रस्तुति की गई। इसके बाद शोहदाए कर्बला को पुरसा पेश किया गया और इमाम हुसैन (अ.स.) तथा उनके 72 साथियों की कुर्बानियों को याद करते हुए दुआएं की गईं। हज़रत अली असगर (अ.स.) के झूले के दर्शन के लिए भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद पहुंचे। जुलूस के दौरान कस्बे में श्रद्धा और गम का माहौल था। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और अज़ादारों के लिए सबील व अन्य व्यवस्थाएं कीं। पूरी व्यवस्था को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में जुलूस कमेटी और स्थानीय स्वयंसेवकों ने अहम भूमिका निभाई। धार्मिक अनुशासन और आपसी भाईचारे के माहौल में संपन्न हुए इस जुलूस ने कर्बला के सच्चाई, इंसाफ, सब्र और कुर्बानी के पैगाम को जीवंत किया। देर रात दरगाह पर मजलिस, दुआ और पुरसा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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संभल में 12 मोहर्रम पर निकला जुलूस-ए-मेहंदी:हजारों अज़ादारों ने शोहदाए कर्बला को दी श्रद्धांजलि