संजय वर्मा गनर हत्याकांड के 8 दोषियों को सजा आज:झांसी में 7 साल पहले बरसाई थी गोलियां, रंजिश में अब तक 3 हत्याएं


झांसी के कचहरी चौराहे पर 7 साल पहले जमीन कारोबारी संजय वर्मा पर दिनदहाड़े हुई फायरिंग और उनके गनर की हत्या के चर्चित मामले में 8 दोषियों को शनिवार को सजा सुनाई जा सकती है। शुक्रवार को कोर्ट ने इनको दोषी करार देते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। वही, सरदार सिंह गुर्जर समेत 8 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। आज अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुभव द्विवेदी (आवश्यक वस्तु अधिनियम) की कोर्ट में सजा पर सुनवाई होनी है। इसको लेकर कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बता दें कि सरदार सिंह गुर्जर और संजय वर्मा के बीच वर्चस्व की लड़ाई सालों तक खूनी संघर्ष में बदलती रही। इस दुश्मनी में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है। अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए कोर्ट में तारीख करके लौट रहे थे कोतवाली क्षेत्र के बड़ा बाजार स्थित मजदूरों वाली गली निवासी जमीन कारोबारी संजय वर्मा पर 21 जुलाई 2018 को कोर्ट में तारीख करके पजेरो कार से लौट रहे थे। जब वह कचहरी चौरााहे के पास पहुंचे तो बाइक सवार हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थी। इस सनसनीखेज वारदात में गोली लगने से उनके अंगरक्षक लक्ष्मी गेट बाहर निवासी जय गोस्वामी की मौत हो गई थी। वहीं संजय वर्मा, उनाव गेट बाहर निवासी सुनील कुशवाहा और चालक रवि वर्मा घायल हो गए थे। संजय के बेटे संचित की तहरीर पर नवाबाद थाने में केस दर्ज हुआ था। जिसमें चतुरयाना निवासी सोनू गेड़ा, रिंकू गेड़ा, बॉबी गेड़ा, लकारा निवासी अंगद गुर्जर, प्रहलाद गुर्जर, ऊधम सिंह गुर्जर, राजेंद्र गुर्जर, पुष्पेंद्र गुर्जर और शिवम गुर्जर समेत नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी से भी कराई गई, जिसमें शिवम का नाम हटा दिया गया था। 16 आरोपियों के खिलााफ चल रहा था मुकदमा सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल ने बताया कि 16 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में केस चल रहा था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 21 गवाह और कई अहम साक्ष्य कोर्ट में पेश किए। करीब 7 साल 10 महीने चली सुनवाई और जिरह के बाद कोर्ट ने शुक्रवार को बॉबी उर्फ संदीप गुप्ता, रिंकू गेड़ा उर्फ मनीष, राजेंद्र गुर्जर, भूपेंद्र सिंह उर्फ पुष्पेंद्र, प्रहलाद, ऊधम सिंह गुर्जर और कमलेश यादव को दोषी करार दिया था। वहीं, षड्यंत्र रचने के आरोपी सरदार सिंह गुर्जर, राव राजा, भरत सिंह, सनम डागर, गौरव उर्फ मोंटी, सागर राणा, नीतेश पटवारी और रोहित उर्फ रोहताश के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें बरी कर दिया गया। जिन 8 दोषियों को सजा, उनकी तस्वीरें

दिनदहाड़े 20 राउंड फायरिंग से दहल उठा था इलाका शहर के बीचोबीच दिनदहाड़े हुई इस घटना से पूरा इलाका दहल उठा था। बाइक सवार बदमाशों ने करीब 2 मिनट तक फायर किए थे। इस दौरान 20 राउंड फायरिंग हुई थी। बदमाशों ने दोनों हाथों में असलहे लिए थे। जिस समय हमला हुआ, उस समय कचहरी चौराहे पर खासी भीड़ थी। अचानक ही गोलियां चलने से भगदड़ मच गई। राहगीर वाहन छोड़कर भाग निकले। दुकानदारों ने आनन-फानन में दुकानें बंद कर दी थी। गोलियों से बचने के चक्कर में ही एक लोडर चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। वह कुछ दूर जाकर पलट गया। वारदात के बाद पहुंची पुलिस को घटना स्थल एवं कार से खाली खोखे ही खोखे मिले थे। अंगरक्षक जय गोस्वामी का पोस्टमार्टम कराने पर उसके शरीर के अंदर 11 गोलियां मिली थीं, जबकि घायल संजय वर्मा के शरीर में एक गोली, सुनील कुशवाहा के 3 गोलियां एवं रवि वर्मा के शरीर में 2 गोलियां पाई गई थीं। सीडीआर, सीसीटीवी और बैलास्टिक रिपोर्ट अहम बनी बहुचर्चित मामले को अंतिम मुकाम तक पहुंचने में करीब 7 साल 10 महीने लग गए। इस दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच लंबी कानूनी लड़ाई चली। दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलों और साक्ष्यों के जरिए पूरी ताकत झोंक दी। मामले में कुल 46 गवाह पेश किए गए, जिनमें अभियोजन पक्ष के 21 और बचाव पक्ष के 25 गवाह शामिल रहे। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि घटना के दिन अधिकांश आरोपी झांसी में मौजूद ही नहीं थे। सोनू ने खुद को गोवा में, बॉबी और रिंकू ने भोपाल में, जबकि भूपेंद्र और प्रह्लाद ने आगरा में ताजमहल घूमने की बात कही। ऊधम गुर्जर ने अदालत को बताया कि वह आगरा में कोर्ट की तारीख पर गया था। हालांकि अभियोजन पक्ष ने इन दावों को खारिज करते हुए सीडीआर, सीसीटीवी फुटेज और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों की घटना के समय झांसी में मौजूदगी साबित की। आरोपी अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सके। अभियोजन पक्ष ने 21 गवाहों के साथ बैलास्टिक रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की, जो मामले में बेहद अहम साबित हुई। रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि घटनास्थल से मिले कारतूस और खोखे उन्हीं हथियारों से फायर किए गए थे, जिन्हें बाद में पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर बरामद किया था। इनमें 9 एमएम पिस्टल और तमंचा भी शामिल था। 2 नाम हटाने पर सीबीसीआईडी विवेचक पर दर्ज हुई थी FIR मामले की जांच नवाबाद पुलिस, जालौन पुलिस और फिर सीबीसीआईडी ने की थी। सीबीसीआईडी विवेचक जेपी यादव ने विवेचना के दौरान सोनू, रिंकू और बॉबी के नाम भी प्राथमिकी से हटा दिए थे। आरोपियों के वकीलों ने इसी आधार पर कोर्ट से राहत मांगी थी। इसकी जानकारी होने पर संजय वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित जांच समिति ने पाया कि विवेचक ने गोपनीयता भंग करते हुए आरोपियों को केस डायरी के दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। इसके बाद विवेचक जेपी यादव के खिलाफ नवाबाद थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। यह मामला अभी विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने 30 मई तय की थी समय सीमा मामले की सुनवाई की निगरानी सीधे सुप्रीम कोर्ट कर रहा था। स्थानीय अदालत से हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट भेजी जाती थी। 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक वर्ष के भीतर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था, लेकिन सुनवाई लंबी खिंचने के कारण तीन बार समय सीमा बढ़ाई गई। मामले में 30 मई अंतिम समय सीमा तय की गई थी। सरदार गुर्जर और संजय वर्मा के बीच पुरानी अदावत ने ली थी कई जानें लकारा निवासी सरदार सिंह गुर्जर और जमीन कारोबारी संजय वर्मा के बीच वर्चस्व की लड़ाई सालों तक खूनी संघर्ष में बदलती रही। इस दुश्मनी में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अदावत की शुरुआत 2004 में हुई, जब सरदार सिंह गुर्जर के भतीजे और भरत सिंह के बेटे चंद्रशेखर गुर्जर की नवाबाद क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में संजय वर्मा और उसके साथियों पर आरोप लगे थे। इसके दो साल बाद 2006 में संजय वर्मा के भाई और सर्राफा कारोबारी अजय वर्मा की दुकान में घुसकर गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले में सरदार सिंह गुर्जर, मानसिंह गुर्जर, राव राजा, भोला, भरत गुर्जर समेत चतुरयाना निवासी सोनू और बॉबी गेड़ा को आरोपी बनाया गया था। इन दो हत्याओं के बाद दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी लगातार बढ़ती गई। इसका सबसे बड़ा अंजाम 21 जुलाई 2018 को सामने आया, जब कचहरी चौराहे पर दिनदहाड़े संजय वर्मा पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। इस हमले में उनके अंगरक्षक जय गोस्वामी की मौत हो गई थी। रोहित को छोड़कर जेल में हैं सभी आरोपी शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों को अलग-अलग जेल से झांसी के कोर्ट में लाया गया था। इसको देखते हुए कोर्ट परिसर में बेहद सख्त सुरक्षा रही। इस मामले में रोहित ही जमानत पर है, जबकि अन्य सभी किसी न किसी जेल में बंद हैं। दोष सिद्ध बॉबी गेड़ा एवं रिंकू झांसी जेल में है, जबकि राजेंद्र गुर्जर अलीगढ़, भूपेंद्र सिंह उर्फ पुष्पेंद्र फिरोजाबाद जेल में है। उधम सिंह गुर्जर कासगंज, प्रहलाद कन्नौज, सोनू चित्रकूट एवं कमलेश यादव अभी फतेहपुर जेल से यहां लाया गया। वहीं, साक्ष्य के अभाव में बरी हुआ राव राजा केंद्रीय कारागार नैनी, भरत सिंह बरेली, सरदार सिंह इटावा, गौरव उर्फ मोंटी करनाल, सागर राणा मनडौली, सनम डागर एवं नीतेश पटवारी झज्जर जेल से यहां लाए गए थे। इनकी सुरक्षा के लिए कोर्ट के बाहर नवाबाद समेत आसपास के थानों से पुलिस बल मौजूद रहा। षडयंत्र रचने का सुबूत न मिलने से छूटा सरदार नवाबाद थाने में 9 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस की विवेचना में षडयंत्र रचने के तौर पर सरदार सिंह गुर्जर, राव राजा, भरत सिंह, गौरव उर्फ मोंटी, सागर राणा, सनम डागर एवं नीतेश पटवारी का नाम सामने आया। पुलिस ने इनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी हालांकि यह सभी घटना के समय जेल में थे। बचाव पक्ष ने भी इसी का सहारा लिया। बचाव पक्ष का कहना था कि वारदात से भी कई साल पहले यह सभी जेल में बंद थे। उनकी मुलाकात भी नहीं हो रही थी। इस वजह से उनकी कोई भी भूमिका नहीं है। अभियोजन पक्ष की ओर से इनके खिलाफ कोई मजबूत साक्ष्य नहीं दिए जा सके। इस वजह से कोर्ट ने सरदार समेत आठ को इस मामले में बरी कर दिया।

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