![]()
अम्बेडकरनगर में भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद देव पटेल को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है। संगठन में सक्रिय रहे युवा चेहरे को कमान मिलने के बाद स्वागत और अभिनंदन का दौर भी पूरा हो चुका है, लेकिन इसके साथ ही संगठन के भीतर उठ रहे कुछ सवाल नए जिलाध्यक्ष के लिए शुरुआती चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं। जिलाध्यक्ष के जनपद आगमन पर हुए स्वागत समारोह में लगे कुछ नारों ने कार्यकर्ताओं को असहज कर दिया। “तख्त बदल दो, ताज बदल दो, बेईमानों का राज बदल दो” जैसे नारों को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा रही कि जब प्रदेश से लेकर केंद्र तक भाजपा की सरकार है तो आखिर यह नारा किसके खिलाफ था। कई कार्यकर्ताओं ने इसे कार्यक्रम में शामिल बाहरी समर्थकों की राजनीतिक संस्कृति का असर बताया। क्षत्रिय समाज से जुड़े कार्यकर्ताओं में भी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि जिले में विधानसभा टिकट से लेकर संगठन के प्रमुख पदों तक उनकी भागीदारी लगातार घटती जा रही है। ऐसे में जनपद प्रवेश के दौरान मार्ग में स्थित महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण न करना भी चर्चा का विषय बन गया। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह अवसर सामाजिक समरसता का संदेश देने का था, जो चूक गया। सबसे ज्यादा चर्चा जिलाध्यक्ष के उस बयान की रही जिसमें उन्होंने संगठन को “शून्य से शिखर” तक पहुंचाने की बात कही। पार्टी के कई पुराने कार्यकर्ताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जिले में भाजपा का विधायक, एमएलसी, जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और कई निकाय प्रतिनिधि हैं। ऐसे में संगठन को “शून्य” बताना कार्यकर्ताओं की वर्षों की मेहनत को नजरअंदाज करने जैसा है। स्वागत कार्यक्रम के दौरान कुछ वरिष्ठ नेताओं के साथ हुए व्यवहार को लेकर भी असंतोष सामने आया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन में नई ऊर्जा का स्वागत है, लेकिन अनुभव और वरिष्ठता के सम्मान की परंपरा भी बनी रहनी चाहिए। नए जिलाध्यक्ष को पद संभालते ही यह संदेश मिल गया है कि सिर्फ स्वागत मालाओं से संगठन नहीं चलता।उन्हें नाराज कार्यकर्ताओं को साधना होगा, सामाजिक संतुलन बनाना होगा और शब्दों व व्यवहार दोनों में परिपक्वता दिखानी होगी।
Source link
शून्य' कहकर जिलाध्यक्ष ने अपनी ही पार्टी पर उठाए सवाल:अम्बेडकरनगर बीजेपी में 'शून्य' वाले बयान और नारों से कार्यकर्ताओं में असंतोष