शहर से बुरी यादें लेकर लौटा सागर का परिवार:जिंदगी नये सिरे से शुरु करने की चुनौती, सात को मिली छुट्टी, घर पर ताला


मेरठ के कृष्णा नगर डोरली में हुए अग्निकांड ने पीड़ित परिवारों को तोड़कर रख दिया है। दोनों ही परिवार फिर से उठ खड़े होने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। जिंदगी में अब तक जो कुछ जुटाया था, सबकुछ खो दिया है। इस हादसे ने उन्हें इतने गहरे जख्म दिए हैं, जिनका जल्दी भर पाना संभव ही नहीं दिखता। मंगलवार को सागर का परिवार शहर से जुड़ी इन बुरी यादों को लेकर अपने गांव लौट गया। अस्पताल में संजय की पत्नी सरिता, बेटा आशु व बेटी भावना उपचाराधीन हैं। तीन तस्वीरें देखें… पहले जानते हैं हादसे के बारे में
मेरठ के रुड़की रोड स्थित रोशनपुर डोरली में सतीश का मकान है, जिसमें रोहटा निवासी सागर और बना मसूरी मवाना रोड निवासी संजय अपने परिवार के साथ रह रहे थे। इसी मकान में एक तीसरा किराएदार अरुण पुत्र रोहताश निवासी रोहटा भी अकेला रहता था। जबकि अगले हिस्से में डोरली निवासी कृष्णपाल टेंट की दुकान चलाता था। रविवार आधी रात को जब यह परिवार सोए थे, तभी मकान के अगले हिस्से में आग लग गई और पूरा परिवार अंदर फंस गया। बेहोश होकर गिरा पूरा परिवार
करीब पंद्रह मिनट तक यह परिवार खुद को सुरक्षित रखने का प्रयास करते रहे लेकिन फिर इतना गहरा काला धुआं कमरों में पहुंच गया कि वह हिम्मत हार गए और बेहोश होकर वहीं गिर गए। पल्लवपुरम पुलिस और दमकल की टीमों ने कांति पत्नी भूषण गिरी, ज्योति पत्नी सागर, शिव पुत्र सागर, करन पुत्र सागर, सरिता पत्नी संजय, आशु पुत्र संजय, प्रिंस पुत्र संजय, करन पुत्र संजय, भावना पुत्री संजय के अलावा अरुण पुत्र रोहताश को भर्ती कराया जबकि सागर व उसकी बेटी शिवानी की दम घुटने के कारण मौत हो गई। सबकुछ छोड़ गांव लौटा परिवार
मंगलवार को सागर के परिवार के सदस्यों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। मां कांति, पत्नी ज्योति, बेटे शिव व करण को स्वास्थ्य में सुधार के बाद रिलीव कर दिया गया। रोहटा गांव से काफी ग्रामीण वहां पहुंचे थे जो पूरे परिवार को लेकर गांव लौट गए। हालांकि सागर व शिवानी का एक दिन पहले ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। तीन लोग अभी अस्पताल में भर्ती
मंगलवार को संजय के बेटे करण व प्रिंस को भी अस्पताल से छुट्टी मिल गई। अब अस्पताल में बड़ा बेटा आशु व बेटी भावना भर्ती हैं। पत्नी सरिता भी आईसीयू में है। आशु व भावना के सीने में धुआं जम चुका है, जिस कारण खासी ठीक नहीं हो रही है। खासी आती है तो बलगम निकलता है और साथ निकलती है अंदर जमी गंदगी। सरिता को भी सांस लेने में दिक्कत हो रही है। मंजर याद कर सहम जाती है भावना परिजनों की मानें तो चुलबुली भावना इस हादसे के बाद सदमे में है। वह किसी से ज्यादा बात नहीं कर रही है। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान भावना ने बताया कि करीब पंद्रह मिनट वह एक कमरे में बंद रहे लेकिन जैसे ही धुआं घुसा बारी बारी सब बेहोश होते चले गए। वह उस मंजर को याद कर सहम जाती है। मकान के मुख्य दरवाजे पर लटका ताला
दो दिन पहले तक जिस घर में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब अजीब सा सन्नाटा पसर गया है। ना जाने किसकी नजर इन परिवारों को लग गई। इन परिवारों के द्वारा जो कुछ जोड़ा गया था, वह लगभग सभी खाक हो चुका है। फिलहाल घर पर ताला डालकर सबकुछ वहीं छोड़ दिया गया है। परिवार को लेकर शहर शिफ्ट होंगे संजय
रोहटा निवासी सागर अपने परिवार के साथ काफी समय से इस मकान में रहते चले आ रहे थे। वह फास्ट फूड का काम कर अपनी जीविका चलाते थे जो हादसे के बाद काफी पीछे छूट गया है। संजय डेढ़ माह पहले ही इस मकान में शिफ्ट हुए थे। वह बुढ़ानागेट की पेपर मार्किट में काम करते हैं। मकान के अंदर जो कुछ था, सबकुछ खाक हो चुका है। ऐसे में संजय अपने परिवार को लेकर अब शहर के भीतर शिफ्ट होने का मन बना चुके हैं।

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