शहबाज सरकार ने पाकिस्तान के खैबर पख्तुनख्वा में इमरजेंसी लगाई:यहां इमरान खान की पार्टी की सरकार; PAK पीएम बोले- आतंकवाद बर्दाश्त नहीं


पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रविवार को खैबर पख्तूनख्वा (KP) प्रांत में इमरजेंसी लागू कर दी। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संघीय कैबिनेट की सिफारिश को मंजूरी दे दी। शहबाज सरकार का आरोप है कि इमरान खान की PTI सरकार प्रांत में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में जानबूझकर सहयोग नहीं कर रही है। पाक सरकार आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करेगी। इमरान खान की पार्टी PTI ने फैसले का विरोध किया यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई आपात कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक में प्रांत की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई। सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 232 और 234 के तहत इमरजेंसी और गवर्नर शासन लागू करने का फैसला किया। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी PTI ने इस कदम का विरोध किया है। पार्टी अध्यक्ष गौहर अली खान ने इसे अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि प्रांत के अधिकार कमजोर करके शांति और स्थिरता नहीं लाई जा सकती। शहबाज ने अफगानिस्तान पर आतंकवादी संगठन पर लगाम न लगाने का आरोप लगाया पाक पीएम शरीफ ने बैठक में कहा कि PTI की अगुवाई वाली प्रांतीय सरकार को देश की अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में आम नागरिकों, पुलिसकर्मियों, सुरक्षाबलों और बच्चों की मौतों पर भी चिंता जताई। शहबाज ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लगातार पड़ोसी अफगानिस्तान से आतंकवादी संगठनों पर लगाम लगाने की अपील करता रहा है, लेकिन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। इमरजेंसी और गवर्नर शासन का क्या मतलब है? पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 232 के तहत युद्ध, बाहरी हमले या ऐसी गंभीर आंतरिक अशांति की स्थिति में इमरजेंसी लागू की जा सकती है, जिसे प्रांतीय सरकार नियंत्रित न कर पा रही हो। इस दौरान संसद को प्रांत के कुछ ऐसे मामलों पर भी कानून बनाने का अधिकार मिल सकता है, जो सामान्य स्थिति में प्रांतीय अधिकार क्षेत्र में आते हैं। वहीं, अनुच्छेद 234 के तहत प्रांत में संवैधानिक व्यवस्था विफल होने पर गवर्नर शासन लगाया जा सकता है। इसके लिए राष्ट्रपति की घोषणा को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में मंजूरी मिलना जरूरी है। मंजूरी के बिना यह घोषणा दो महीने बाद समाप्त हो जाती है। मंजूरी मिलने पर भी इसे एक बार में दो महीने से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता और इसकी कुल अवधि छह महीने से अधिक नहीं हो सकती। सरकार ने इस फैसले के साथ संविधान के अनुच्छेद 233 का जिक्र नहीं किया है। यह अनुच्छेद इमरजेंसी के दौरान कुछ मौलिक अधिकारों को निलंबित करने से संबंधित है। PTI ने फैसले को अलोकतांत्रिक बताया PTI अध्यक्ष गौहर अली खान ने इमरजेंसी और गवर्नर शासन के फैसले की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह गंभीर राजनीतिक गलती है और जनता के अधिकारों के खिलाफ उठाया गया अलोकतांत्रिक कदम है। गौहर ने कहा कि आतंकवाद खत्म करने के मुद्दे पर कोई मतभेद नहीं है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को लोगों की आवाज दबाने या प्रांत के संवैधानिक अधिकार सीमित करने का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की। साथ ही कहा कि उनकी पार्टी जनता के अधिकारों, प्रांतीय स्वायत्तता और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए संवैधानिक और कानूनी मंचों पर इस मुद्दे को उठाएगी। गवर्नर ने लोगों से एकजुट होने की अपील की खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने कहा कि यह फैसला प्रांत में शांति स्थापित करने, लोगों की खुशहाली और विकास के लिए लिया गया है। उन्होंने राजनीतिक मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की। कुंडी के मुताबिक, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में लोगों और सुरक्षाबलों ने बड़ी कुर्बानियां दी हैं। अब जरूरत है कि इन कुर्बानियों को बेकार न जाने दिया जाए और प्रांत में स्थायी शांति स्थापित की जाए। नए मुख्य सचिव की नियुक्ति गवर्नर शासन लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने डॉ. मुहम्मद फखर आलम इरफान को खैबर पख्तूनख्वा का मुख्य सचिव नियुक्त किया है। वह इससे पहले पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय के पावर डिवीजन में सचिव के पद पर तैनात थे। सरकारी अधिसूचना के मुताबिक, उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *