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आजकल टोमैटो, चिली सॉस, केचअप और मेयोनीज ज्यादातर लोगों की पसंद बन चुकी है। खाने को चटपटा और टेस्टी बनाने के लिए लोग इसका सेवन करते हैं। ऐसे में आये दिन इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है। टोमैटो, चिली सॉस, केचअप और मेयोनीज का मार्केट में बढ़ती मांग को देखते हुए कुछ कारोबारी इसका फायदा उठा रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में कम क्वालिटी के सामान, केमिकल वाले रंग और अन्य सस्ती चीजों का इस्तेमाल कर सॉस बनाते हैं और बेतहाशा सप्लाई करते हैं। हाल ही में गोरखपुर के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम सूबा बाजार स्थित रीतिमा फूड प्रोडक्ट्स फैक्ट्री में छापेमारी की। इस दौरान वहां फैली गंदगी और मानकों का पालन करने की वजह से लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही 50 किलो सॉस को मौके से नष्ट करवाया गया और 350 किलो को जब्त कर लिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे चीजों को खाने से फूड पॉइजनिंग की समस्या होती है। लीवर खराब होने का भी डर लगा रहता है। इसका सेवन बहुत ही खतरनाक हो सकता है। टेस्ट के लिए भेजा गया सैंपल
फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के असिस्टेंट कमिश्नर डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि चिली सॉस, मेयोनीज और वेज सॉस सहित अन्य के सैंपल टेस्ट के लिए लैब भेज दिए गए। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा जाएगी। फैक्ट्री में फैली थी गंदगी
फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट को काफी समय से शिकायत मिल रही थी कि बाजार में घटिया क्वालिटी का सॉस सप्लाई किया जा रहा है। जब टीम ने कारखाने पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखने लायक था। चारों तरफ गंदगी फैली थी, मक्खियां भिनभिना रही थीं और सॉस बनाने में इस्तेमाल होने वाले सब्जियां और अन्य सामान बेहद ही खराब स्थिति में इधर-उधर बिना किसी सुरक्षा के फेंके गए थे। कई सॉस तो ऐसे थे जिनकी एक्सपायरी डेट महीनों पहले निकल चुकी थी, फिर भी उन्हें नई पैकिंग में बाजार में भेजने की तैयारी थी। अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सेहत के लिए खतरनाक बन चुके 50 किलो सॉस को मौके पर ही नष्ट करवा दिया। इसके साथ ही कारखाने में रखा 350 किलो सॉस और मेयोनीज का स्टॉक जब्त कर दिया गया। सॉस के सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए गए हैं। केमिकल वाले रंगों का कर रहे थे इस्तेमाल
उन्होंने बताया कि फैक्ट्री के अंदर कई तरह के केमिकल वाले रंग भी मिले। जिसका इस्तेमाल सॉस को रंगीन करने के लिए किया जा रहा था। रेड चिली सॉस के लिए लाल रंग और ग्रीन चिली सॉस के हरे रंग का इस्तेमाल कर रहे थे। पेनाल्टी और जेल का प्रावधान
डॉ. सुधीर सिंह ने बताया कि लगभग एक हफ्ते में सैंपल का रिपोर्ट आएगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि खाने में मिलावटी और मानकों का पालन न करने पर दोषियों पर पेनाल्टी और जेल का प्रावधान है। लीवर हो सकता है डैमेज
वहीं इस मामले पर डॉक्टरों ने लोगों को चेतावनी दी है। डॉक्टर बीके सुमन का कहना है कि इन खराब और मिलावटी सॉस में खतरनाक केमिकल और सड़े हुए सामान का इस्तेमाल होता है। इसे खाने से तुरंत फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त और पेट में भयंकर इन्फेक्शन हो सकता है। साथ ही लगातार ऐसे सॉस का इस्तेमाल करने से लीवर पूरी तरह खराब (डैमेज) हो सकता है और पेट का अल्सर भी बन सकता है। सबसे डरावनी बात यह है कि इन सॉस को गाढ़ा और चमकदार बनाने के लिए जो सिंथेटिक रंग और केमिकल मिलाए जाते हैं, वे लंबे समय में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का कारण बन सकते हैं। खुले में सॉस खाने से बचे
फूड विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि शहर के लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले दिनों में चाउमीन और मोमोज बेचने वाले ठेलों और दुकानों पर भी चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे सड़क किनारे मिलने वाले सस्ते और खुले सॉस को खाने से बचें और अपनी सेहत का ध्यान रखें।
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'वो चपटपटा सॉस नहीं, बीमारी का घर है':गोरखपुर में मिलावटी सॉस बनाने वाली फैक्ट्री पर कार्रवाई, 50 KG नष्ट, 350 KG जब्त