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मऊ के विकास भवन स्थित अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय में सोमवार को 20वें सांख्यिकी दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारतीय सांख्यिकी के जनक और प्रख्यात वैज्ञानिक प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस अवसर पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके जीवन, कार्यों और देश के आर्थिक नियोजन में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान को याद किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ने बताया कि सांख्यिकी दिवस वर्ष 2007 से प्रतिवर्ष राष्ट्रीय महत्व की एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 के लिए “प्रशासनिक डेटा की क्षमता को अनलॉक करना” विषय निर्धारित किया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक डेटा के प्रभावी और वैज्ञानिक उपयोग से सरकार बेहतर नीतियां बना सकती है, जिससे जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।उन्होंने आगे बताया कि प्रशासनिक डेटा के बेहतर उपयोग से निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सटीक बनती है। पंचवर्षीय योजना के निर्माण में अहम भूमिका निभाई साथ ही, विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी भी प्रभावी तरीके से की जा सकती है। इस दिशा में भारत सरकार द्वारा विकसित नेशनल डेटा एंड एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म (NDAP) एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से 52 से अधिक मंत्रालयों और 31 विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े आंकड़े एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और आम नागरिकों को विश्वसनीय आंकड़ों तक आसान पहुंच मिल रही है। कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस के जीवन और उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने भारतीय सांख्यिकीय संस्थान की स्थापना की थी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वर्ष 1955 से 1967 तक योजना आयोग के सदस्य के रूप में कार्य करते हुए देश की द्वितीय पंचवर्षीय योजना के निर्माण में अहम भूमिका निभाई। उनके योगदान ने भारत के सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस अवसर पर सांख्यिकी के महत्व, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और प्रशासनिक डेटा के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
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विकास भवन में 20वां सांख्यिकी दिवस मनाया गया:प्रशासनिक डेटा के प्रभावी उपयोग पर दिया गया जोर