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कानपुर के वार्ड-41 आवास विकास हंसपुरम में विकास की हकीकत सुखद नहीं है। जिस वाटर पार्क को क्षेत्र की पहचान बताया गया, वहां वर्षों से पानी की एक बूंद तक नहीं है। बाहर बना सार्वजनिक शौचालय ताले में कैद है। टूटी सड़कें, उफनाते सीवर, अंधेरे में डूबी गलियां और पेयजल संकट से लोग जूझ रहे हैं। हालत यह है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाएं शोपीस बन चुकी हैं। खास बात यह है कि इन समस्याओं पर पार्षद ने बोलने से भी इनकार कर दिया। जबकि यहां के बाशिंदों का कहना है कि विकास कुछ नहीं हुआ, सब अंधेरनगरी है। दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा के दौरान क्षेत्रवासियों का गुस्सा खुलकर सामने आया। लोगों ने बताया कि सड़कें वर्षों से टूटी हैं, स्ट्रीट लाइटें बंद रहती हैं, नालों की सफाई अधूरी छोड़ दी जाती है और शिकायतों के बाद भी केवल आश्वासन मिलता है। वार्ड की समस्याओं पर बात करने के लिए पहुंची टीम से पार्षद ने बातचीत करने से इनकार कर दिया। दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इस कड़ी में वार्ड-41 का जायजा लिया गया… सूखा पड़ा वाटर पार्क, चेतावनी बोर्ड बना मजाक हंसपुरम का वाटर पार्क कभी क्षेत्र की पहचान माना जाता था, लेकिन आज वहां का नजारा विकास कार्यों की पोल खोलता है। पार्क के भीतर बने तालाब में पानी नहीं है, जबकि उसके किनारे आज भी चेतावनी बोर्ड लगा है कि तालाब तीन मीटर से अधिक गहरा है और उसमें प्रवेश न करें। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के समय यहां बोटिंग की बात कही गई थी, लेकिन तालाब में कभी पानी भरा ही नहीं गया। आज यह पार्क नाम का वाटर पार्क बनकर रह गया है। पहले ये नजारा देखिए… शौचालय बना शोपीस, गेट पर लटका मिला ताला वाटर पार्क के बाहर बना सार्वजनिक शौचालय भी लोगों के किसी काम का नहीं है। निरीक्षण के दौरान उसके मुख्य गेट पर ताला लटका मिला। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के कई सार्वजनिक शौचालय इसी तरह बंद पड़े रहते हैं, जिससे राहगीरों और बाजार आने-जाने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है। टूटी सड़कों पर रोज हो रही परीक्षा वार्ड की सबसे बड़ी समस्याओं में जर्जर सड़कें शामिल हैं। सेक्टर-3सी, सेक्टर-3बी, ब्रह्मदेव चौराहा, हमीरपुर बाईपास के समानांतर सड़क और जागृति चौराहे के आसपास कई सड़कें उखड़ी पड़ी हैं। लोगों का कहना है कि बारिश होते ही सड़कें तालाब बन जाती हैं और गड्ढों में वाहन फंस जाते हैं। कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ। नालों की सफाई के बाद सिल्ट बनी मुसीबत क्षेत्र के कई नालों की सफाई तो हुई, लेकिन निकाली गई सिल्ट कई दिनों तक सड़क किनारे पड़ी रही। तेज हवा चलने पर यही गंदगी लोगों के घरों तक पहुंचती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायत के बाद अधिकारी सिल्ट हटाने का आश्वासन देते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। अंधेरे में डूब जाती हैं गलियां हंसपुरम की कई गलियां और सड़कें रात होते ही अंधेरे में डूब जाती हैं। कई स्ट्रीट लाइटें खराब हैं और नई लाइटें वर्षों से नहीं लगी हैं। महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि अंधेरे के कारण सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है। सीवर ओवरफ्लो और कूड़े के ढेर वार्ड के कई हिस्सों में सीवर का गंदा पानी सड़कों पर बहता मिला। इससे दुर्गंध फैलती है और लोगों का निकलना मुश्किल हो जाता है। दूसरी ओर समय से कूड़ा न उठने के कारण कई जगह कूड़े के ढेर भी दिखाई दिए। छठ घाट की नहर में जमी काई धार्मिक महत्व रखने वाले छठ पूजा घाट की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। घाट के पास स्थित नहर में काई की मोटी परत जमी हुई है। लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से घाट की सुंदरता और स्वच्छता दोनों प्रभावित हो रही हैं। वार्ड की बड़ी समस्याएं सूखा पड़ा वाटर पार्क: करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किया गया वाटर पार्क वर्षों से बिना पानी के पड़ा है। बोटिंग जैसी योजनाएं कागजों में ही सिमट गईं। टूटी और जर्जर सड़कें: सेक्टर-3सी, ब्रह्मदेव चौराहा और हमीरपुर रोड के आसपास की सड़कें उखड़ी हुई हैं। बारिश में हालात और खराब हो जाते हैं। स्ट्रीट लाइटें बंद: कई इलाकों में स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। रात में अंधेरा रहने से सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। सीवर और नालों की समस्या: सीवर ओवरफ्लो, भरे नाले और सड़कों पर फैला गंदा पानी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। सिल्ट और कूड़ा उठान में लापरवाही: नाला सफाई के बाद निकाली गई सिल्ट समय से नहीं उठाई जाती। कई जगह कूड़े के ढेर भी लगे रहते हैं। पेयजल संकट: कई इलाकों में लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है। सबमर्सिबल पंप बंद पड़े हैं। लोग बोले- सड़कें टूटीं, सुनवाई नहीं अनुज त्रिपाठी ने बताया कि सेक्टर-3सी की सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। बारिश में सड़क तालाब बन जाती है और बजट का हवाला देकर काम टाल दिया जाता है। पंकज सिंह तोमर ने कहा कि हमीरपुर रोड के समानांतर बनी सड़क इतनी खराब है कि वाहन गड्ढों में उतर जाते हैं। राजरानी ने बताया कि सड़क पर पानी भरने से निकलना मुश्किल हो जाता है। हर बार कहा जाता है कि पैसा पास होने पर सड़क बन जाएगी। अंधेरा, गंदगी और सीवर ने बढ़ाई परेशानी प्रदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि जगह-जगह कूड़ा पड़ा रहता है और नियमित सफाई नहीं होती। शिवम गौतम ने बताया कि भरे नालों का पानी लोगों के घरों तक पहुंच जाता है, लेकिन शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती। राहुल दुबे ने कहा कि सेक्टर-सी में कई घरों के बाहर सीवर का पानी जमा रहता है और सफाई व्यवस्था भी कमजोर है। वाटर पार्क में पानी नहीं, सिर्फ नाम बचा विकास त्रिपाठी ने कहा कि वाटर पार्क में वाटर नाम की कोई चीज नहीं है। शाम के समय वहां हालात और खराब हो जाते हैं तथा शौचालय भी बंद रहता है। हर्ष तोमर ने बताया कि पार्क में पानी नहीं है और वहां असामाजिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि अगर तालाब में पानी भर दिया जाए और व्यवस्थाएं सुधारी जाएं तो पार्क फिर से लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। आशा गुप्ता ने बताया कि इलाके में स्ट्रीट लाइट की ठीक से व्यवस्था नहीं है, जिसकी वजह से डर लगा रहता है। इसके अलावा पार्क भी ठीक होना चाहिए। अनिल दिवाकर ने कहा कि लोगों को दूर दूर से पानी लाना पड़ता है। ब्रह्मदेव चौराहे के पास पार्क मे सबमर्सिबल लगा है लेकिन वह कब शुरु होगा पता नहीं। चंद्रपाल अग्रहरि ने बताया कि 10 दिन से सिल्ट पड़ी है। इसके न उठने से घरों में गंदगी जा रही है। आकर बोले कि उठा लेंगे लेकिन कब उठेगी पता नहीं। पेयजल संकट से जूझ रहे लोग क्षेत्रवासियों ने बताया कि कई इलाकों में पेयजल की समस्या गंभीर है। ब्रह्मदेव चौराहे के पास पार्क में लगा सबमर्सिबल पंप लंबे समय से बंद पड़ा है। मजबूरी में लोगों को दूर-दराज से पानी लाना पड़ता है या फिर पीने का पानी खरीदना पड़ता है। पार्षद ने बोलने से किया इनकार वार्ड की समस्याओं को लेकर जब दैनिक भास्कर की टीम पार्षद दीप्ती सुनील तिवारी के निवास पर पहुंची तो बातचीत का अनुरोध किया गया। हालांकि पार्षद ने संदेश भिजवाया कि उनके वार्ड की स्थिति बेहतर है और उन्हें इस विषय पर कुछ नहीं कहना है। —————— ये खबर भी पढ़िए… पाइपलाइन बिछीं, पानी कभी आया ही नहीं…:वार्ड-102 बेगमपुरवा के रहवासी बोले- सिर्फ कागजों पर बहा बजट, हमें तो कुछ मिला नहीं कागजों में पानी बह रहा है, लेकिन हकीकत में लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। बेगमपुरवा की 30 हजार आबादी परेशान है। करोड़ों रुपये खर्च कर बिछाई गई पाइपलाइनें आज भी शोपीस बनी हैं। लोग बोरिंग और अस्थायी पाइपों के सहारे जिंदगी काट रहे हैं। सीवर व्यवस्था अधूरी है, सफाई बदहाल है और धार्मिक स्थलों तक की सुध लेने वाला कोई नहीं। दैनिक भास्कर की ‘वार्ड परिक्रमा’ में वार्ड-102 बेगमपुरवा की जमीनी तस्वीर सामने आई, जहां विकास के दावों से ज्यादा बदहाली नजर आई। यहां के बाशिंदो ने बताया कि बजट कहां जाता है पता नहीं, उन्हें तो कुछ मिल नहीं रहा। पूरी खबर पढ़ें… —————— ये खबर भी पढ़िए… वार्ड-54 बाहर से पॉश, अंदर देखिए कैसे जी रहे लोग:आवास विकास विनायकपुर में करंट के खतरे से जूझ रहे बाशिंदे, बोले- पोल हटने चाहिए बाहर से पॉश दिखने वाला आवास विकास विनायकपुर वार्ड-54 अंदर से मुसीबतों से भरा है। पार्कों की बदहाली, गंदा पानी और करंट के खतरे से लोग परेशान हैं। मध्यम और उच्चवर्गीय आबादी वाले इस वार्ड में बिजली के तारों का मकड़जाल नजर आता है। पोल और तार घरों के छज्जों से सटकर निकले हैं। वार्डवासी घर के अंदर भी अपने बच्चों की चिंता में दिन-रात परेशान रहते हैं। पार्कों में भी करंट का खतरा है। यहां के मुख्य पार्क में चार ट्रांसफार्मर रखे हैं। दैनिक भास्कर के कैमरे के सामने क्षेत्रवासियों ने विकास के दावों की पोल खोल दी। पूरी खबर पढ़ें…
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वाटर पार्क में वाटर नहीं, सड़कों पर पानी:कानपुर के वार्ड-41 का हाल; पार्षद ने साधी चुप्पी, लोग बोले- अंधेर नगरी है