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हाल के दिनों में राप्ती नदी में नहाने के दौरान डूबने से बच्चों की हुई मौतों के बाद प्रशासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। आपदा मित्रों को नदियों के आसपास तैनात किया जा रहा है। वे बच्चों को नदी में न उतरने के लिए जागरूक कर रहे हैं। आसपास रहने वाले अभिभावकों को भी इसको लेकर जागरूक किया जा रहा है।
कमिश्नर अनिल ढींगरा एवं डीआईजी एस चनप्पा ने राप्ती नदी के घाटों का निरीक्षण किया। इस तरह की घटनाओं के कारणों के बारे मे जानकारी ली। उन्होंने घाटों पर सुरक्षा के आवश्यक उपाय करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर नदी की गहराई अधिक है, वहां सिंचाई विभाग को तत्काल लाल रंग के चेतावनी बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि जागरूकता, निगरानी और सुरक्षा संकेतकों के माध्यम से भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सकता है। अधिकारियों ने साहूकोल उर्फ मिर्जापुर गांव तथा राजघाट क्षेत्र का जायजा लेकर सुरक्षा व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने निर्देश दिया कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लि दुर्घटनाग्रस्त और जोखिम वाले क्षेत्रों में चेतावनी सूचक बोर्ड एवं संकेतक लगाए जाएं। इन बोर्डों को ऐसे स्थानों पर लगाया जा, जहां से लोग आसानी से देख सकें। बोर्ड पर संबंधित थानाध्यक्ष का नाम, मोबाइल नंबर और एनडीआरएफ का संपर्क नंबर भी लिखा जाए। जिससे किसी विपरीत स्थिति में त्वरित सहायता मिल सके। कमिश्नर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि नदी किनारे बसे गांवों में चौपाल आयोजित कर अभिभावकों और ग्रामीणों को जागरूक किया जाए। लोगों को समझाया जाएगा कि वे बच्चों को नदी, तालाबों में नहाने या गहरे पानी वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से रोकें, जिससे हादसों पर अंकुश लगाया जा सके। लोगों को जागरूक कर रहे आपदा मित्र आपदा मित्र लोगों को नदी में नहाने से बचने के लिए जागरूक कर रहे हैं। बच्चों को नदी के तरफ न जाने देने की घोषणा भी की जा रही है। जो बच्चे नदी किनारे खेलते हुए दिख रहे हैं, उन्हें भी नदी में न जाने को लेकर समझाया जा रहा है।
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लगातार हो रहे हादसों पर प्रशासन सख्त:प्ती नदी के घाटों पर पहुंचे कमिश्नर, डीआईजी