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लखीमपुर के जिला कारागार खीरी में आजीवन कारावास की सजा काट रहे सिद्धदोष बंदी प्रमोद कुमार (41) की जिला चिकित्सालय ओयल में उपचार के दौरान मौत हो गई। मामले की मजिस्ट्रियल जांच शुरू कर दी गई है। अपर जिलाधिकारी के आदेश पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी सदर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। गोपालापुर, थाना गोला निवासी राजेंद्र प्रसाद के पुत्र प्रमोद कुमार मुकदमा अपराध संख्या 169/2015 में भारतीय दंड संहिता की धारा 303 और आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे। उन्हें आदर्श कारागार लखनऊ से स्थानांतरित कर 5 जुलाई 2026 को जिला कारागार खीरी लाया गया था। बताया गया है कि पेट के ऑपरेशन के बाद उन्हें जेल में रखा गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान मौत 5 अगस्त को प्रमोद कुमार ने पेट से संबंधित बीमारी की शिकायत की। कारागार चिकित्साधिकारी की सलाह पर उन्हें सुबह करीब 11:55 बजे जांच और उपचार के लिए जिला चिकित्सालय ओयल भेजा गया। अस्पताल में भर्ती कर उनका उपचार किया जा रहा था। इसी दौरान दोपहर करीब 2:47 बजे विशेषज्ञ चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 1 से 7 सितंबर तक दर्ज होंगे बयान मामले की जांच के लिए नामित अधिकारी ने बताया कि घटना से संबंधित लोग 1 सितंबर से 7 सितंबर 2026 तक अपने बयान और साक्ष्य दर्ज करा सकते हैं। इच्छुक व्यक्ति किसी भी कार्यदिवस में दोपहर 12 बजे कलेक्ट्रेट स्थित जांच अधिकारी के कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं। जांच अधिकारी ने संबंधित लोगों से जांच में सहयोग करने की अपील की है।
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लखीमपुर जिला अस्पताल में इलाज के दौरान बंदी की मौत:मजिस्ट्रियल जांच शुरू, 7 सितंबर तक दर्ज होंगे बयान