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लखनऊ के बलरामपुर गार्डन में गुरुवार से 23वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला शुरू हो गया। 11 दिन चलने वाले मेले का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। इस बार मेला ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष की थीम पर है। उद्घाटन अवसर पर रतन सिस्टर्स ईशा-मीशा रतन ने कथक की प्रस्तुति दी। मेले का भ्रमण करने के बाद डिप्टी सीएम ने युवाओं से पुस्तक मेले में आने और किताबें पढ़ने की बात कही। उन्होंने कहा कि पुस्तकें मन को एकाग्र करती हैं और हमें अपने इतिहास व परंपराओं से जोड़ती हैं। मोबाइल फोन में सब कुछ अच्छा नहीं होता। उन्होंने कहा कि अच्छा लेखक बनने के लिए अच्छा पाठक होना भी जरूरी है। रामविलास शर्मा, निराला और रवींद्रनाथ टैगोर के रचना कर्म का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लेखक समाज को दिशा दिखाने का काम करता है। 75 हजार वर्ग फीट में 120 से ज्यादा स्टॉल आयोजकों के अनुसार करीब 75 हजार वर्ग फीट में फैले मेले में 50 से अधिक प्रकाशकों और वितरकों के 120 से ज्यादा स्टॉल लगाए गए हैं। यहां हिंदी, अंग्रेजी समेत विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं का साहित्य, शैक्षणिक पुस्तकें, बाल साहित्य और दुर्लभ पुस्तकों का संग्रह उपलब्ध है। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, प्रयागराज, आगरा, भागलपुर और रायपुर समेत कई शहरों के प्रकाशक मेले में शामिल हुए हैं। यूपी हिंदी संस्थान, यूपी उर्दू अकादमी, रामकृष्ण मठ समेत कई संस्थानों के स्टॉल भी लगाए गए हैं।ईशा-मीशा रतन ने राम वंदना से कथक प्रस्तुति की शुरुआत की। समापन में ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित नृत्य की झलक दिखाई इसके बाद शुद्ध पक्ष, तराना और शिव वंदन की प्रस्तुतियां दी गईं। समापन में ‘वंदे मातरम्’ पर आधारित नृत्य की झलक दिखाई गई। कल से मेले में साहित्यिक आयोजनों का सिलसिला शुरू होगा। मेला रोज सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक चलेगा। यहां खरीदी गई प्रत्येक पुस्तक पर कम से कम 10 प्रतिशत छूट दी जाएगी।
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लखनऊ में 23वां राष्ट्रीय पुस्तक मेला शुरू:'वंदे मातरम्' की 150वीं वर्षगांठ पर थीम, डिप्टी सीएम ने युवाओं से किताबें पढ़ने को कहा