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लखनऊ के गोमतीनगर स्थित पर्वतीय महापरिषद भवन में शुक्रवार को हरेला लोकोत्सव का आयोजन किया गया। पर्वतीय महापरिषद के रजत जयंती वर्ष के तहत मनाए गए इस उत्सव में उत्तराखंड की संस्कृति, लोक परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इसमें बड़ी संख्या में पर्वतीय समाज के लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर ‘पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया गया और पौधों का वितरण भी हुआ। महापरिषद के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी ने हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे पारंपरिक पर्व लोगों को प्रकृति से जोड़ते हैं। महासचिव महेंद्र सिंह रावत ने जानकारी दी कि इस बार हरेला पर्व को पारंपरिक और सांस्कृतिक स्वरूप में विशेष रूप से मनाया गया। झोड़ा नृत्य सहित कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं कार्यक्रम का शुभारंभ हरेला आशीर्वाद गीत ‘जी रैया जागी रैया…’ और एक पर्यावरण गीत से हुआ। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक उत्तराखंडी वेशभूषा में झोड़ा नृत्य सहित कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कुमाऊंनी, गढ़वाली और शौका परिधानों की प्रतियोगिताओं ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। महिलाओं ने हरेला टोकरियों का प्रदर्शन किया उत्सव में श्रेष्ठ हरेला प्रतियोगिता, श्रेष्ठ परिधान प्रतियोगिता और उत्तराखंडी व्यंजन प्रतियोगिता भी आयोजित की गईं। महिलाओं ने सजी हुई हरेला टोकरियों का प्रदर्शन किया, जिनमें से तीन सर्वश्रेष्ठ टोकरियों को सम्मानित किया गया। प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागी को ‘शिव-पार्वती सम्मान’ से नवाजा गया। श्रेष्ठ परिधान और पारंपरिक व्यंजन प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया।
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लखनऊ में हरेला लोकोत्सव धूमधाम से मनाया गया:पर्वतीय महापरिषद ने रजत जयंती वर्ष के तहत किया आयोजन