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लखनऊ में पर्यावरण संरक्षण और बौद्ध दर्शन के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से ‘बोधि-पथ’ कार्यशाला का शुभारंभ किया गया है। यह पहल अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ और उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से डिवाइन ग्लोरी पब्लिक स्कूल , चिनहट में शनिवार को ग्रीष्मकालीन कार्यशाला के तहत शुरू हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व प्रधान संदीप सिंह रिंकू ने अपने संबोधन में इस पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह युवाओं और विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करने का एक प्रेरणादायक प्रयास है। रिंकू ने जोर दिया कि प्रकृति संरक्षण अब केवल एक आवश्यकता नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। बौद्ध दर्शन और पर्यावरण के संबंधों पर चर्चा कार्यशाला के दौरान बौद्ध दर्शन और पर्यावरण के गहरे संबंधों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा, सह-अस्तित्व और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता जैसे सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ये मूल्य वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करने में सहायक हो सकते हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर बल दिया कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखना ही सतत विकास का आधार है। ऐसी कार्यशालाएं युवाओं को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने का संदेश देती हैं। पहले दिन 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया यह कार्यशाला 4 जुलाई से 9 जुलाई तक चलाई जाएगी । पहले दिन 200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें शिक्षक, शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल थे। विद्यालय के प्रबंधक विक्रम सिंह ने अतिथियों का स्वागत और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ सामाजिक चेतना को भी मजबूत करते हैं।
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लखनऊ में 'बोधि-पथ' कार्यशाला शुरू:पर्यावरण संरक्षण और बौद्ध दर्शन पर नई पीढ़ी को जागरूक करने की पहल