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लखनऊ में मदर सेवा संस्थान द्वारा आयोजित चबूतरा थियेटर फेस्टिवल सीजन-10 का रंगारंग शुभारंभ गोमतीनगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में हुआ। महोत्सव के पहले दिन बाल कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों को पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया। फेस्टिवल की पहली प्रस्तुति ‘हमें नष्ट मत करो’ थी। चबूतरा थियेटर पाठशाला के बच्चों ने जंगलों की अंधाधुंध कटाई से उत्पन्न हो रहे संकट को मार्मिक ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। नाटक में हिरण, शेर, चिड़िया और बरगद के पेड़ ने मनुष्यों से अपने अस्तित्व की रक्षा की गुहार लगाई। नाटक के संवादों ने दर्शकों को भावुक कर दिया बच्चों ने दर्शाया कि पेड़ों की कटाई केवल जंगल ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों और पूरे पर्यावरण को खतरे में डाल रही है। नाटक के संवादों ने दर्शकों को भावुक कर दिया। इसमें संदेश दिया गया कि प्रकृति और वन्यजीवों का संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। प्रस्तुति के अंत में “प्रकृति बचेगी, तभी जीवन बचेगा” का संदेश गूंजता रहा। इस नाटक का लेखन और निर्देशन महेश चंद्र देवा ने किया था। मेहनत, त्याग और आत्मसम्मान की मिसाल पेश की दूसरी प्रस्तुति मुंशी प्रेमचंद की कालजयी रचना ‘सुभागी’ पर आधारित थी। कोटवा वार्ड बीकेटी के बच्चों ने इस नाटक का प्रभावशाली मंचन किया। कहानी एक ऐसी बेटी की है, जो कम उम्र में विधवा होने के बावजूद अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बनती है। भाई के स्वार्थी रवैये के बावजूद सुभागी ने मेहनत, त्याग और आत्मसम्मान की मिसाल पेश की। इस नाटक ने समाज में बेटियों की भूमिका, महिला आत्मनिर्भरता और विधवा जीवन से जुड़ी रूढ़ियों पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए। दर्शकों ने बाल कलाकारों के अभिनय की जमकर सराहना की। आयोजकों ने बताया कि दूसरे दिन डॉ. राकेश ऋषभ के नवीन नाटक ‘वाईफोफोबिया’ का मंचन किया जाएगा।
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लखनऊ में चबूतरा थियेटर फेस्टिवल सीजन-10 शुरू:बाल कलाकारों ने दिया पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण का संदेश