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लखनऊ में हिन्दुस्तानी एकेडमी उत्तर प्रदेश, बयार फाउंडेशन और नेशनल पीजी कॉलेज के हिंदी विभाग ने एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसका विषय ‘समकालीन संदर्भ में अवधी संरक्षण एवं संवर्द्धन’ था। यह आयोजन कॉलेज परिसर में हुआ, जिसका शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ किया गया। स्वागत भाषण में प्राचार्य देवेंद्र कुमार सिंह ने अवधी भाषा की समृद्ध परंपरा और उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोक भाषाएं समाज की आत्मा होती हैं और इनके बिना विकास अधूरा है। मुख्य अतिथि पद्मश्री विद्याबिन्दु सिंह ने अवध की संस्कृति को राम की संस्कृति बताया। उन्होंने कहा कि अवधी ने इसे संजोने में अहम भूमिका निभाई है और प्रवासी भारतीयों में भी अवधी तथा उसके लोकगीतों के प्रति गहरा लगाव है। रामचरितमानस जैसी कृतियों का अवधी में बड़ा योगदान अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रोफेसर हरिशंकर मिश्र ने भारतीय संस्कृति के वैश्विक स्वरूप पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस जैसी कृतियों में अवधी का बड़ा योगदान है और वैश्वीकरण के दौर में इसके संरक्षण व मानकीकरण की आवश्यकता बढ़ गई है।बयार फाउंडेशन के अध्यक्ष धर्म नारायण मिश्र ने अवधी को दिल की अभिव्यक्ति बताया, जिसमें भक्ति और प्रेम का अनूठा संगम है। लोक भाषाओं पर पड़ रहे असर पर चिंता व्यक्त की वक्ताओं ने बाजारीकरण और अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव से लोक भाषाओं पर पड़ रहे असर पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने इन भाषाओं को व्यवहार में लाने की आवश्यकता पर बल दिया।संगोष्ठी में अवधी साहित्य, लोकगीत और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम का संचालन हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामकृष्ण ने किया। इस अवसर पर शिक्षक, विद्यार्थी और कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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लखनऊ में अवधी संरक्षण पर राष्ट्रीय संगोष्ठी:हिन्दुस्तानी एकेडमी, बयार फाउंडेशन और नेशनल पीजी कॉलेज ने किया आयोजन