रोबोटिक बटलर- वीडियो क्लिप्स से सीख रहे झाड़ू-पोछा:‘इंसानी गलतियों’ से खुद को दिनोदिन स्मार्ट बनाते जा रहे हैं ह्युमनॉइड रोबोट्स


कल्पना कीजिए कि आप अपने घर में झाड़ू लगा रहे हैं, खाना बना रहे हैं या बगीचे में पानी दे रहे हैं, और कोई आपको इन कामों के लिए पैसे दे रहा हो। यकीन करना मुश्किल है, लेकिन भविष्य के एक बड़े दांव ने इसे मुमकिन बना दिया है। यह ‘ह्यूमनॉइड रोबोट्स’ (इंसान जैसी मशीनें) को प्रशिक्षित करने का एक नए वैश्विक अभियान का हिस्सा है। आज की तारीख में आपके घर के काम की वीडियो क्लिप्स उन ‘एंड्रॉयड बटलर’ (रोबोटिक सहायक) के लिए सबसे कीमती डेटा बन गई हैं, जो आने वाले समय में आपके दफ्तरों और रसोई घरों की जिम्मेदारी संभालेंगे। मशीनों के लिए क्यों जरूरी हैं इंसानी वीडियो? दशकों से रोबोट्स को रिमोट कंट्रोल या वर्चुअल सिम्युलेशन (सॉफ्टवेयर) के जरिये सिखाया जाता रहा है। लेकिन सिम्युलेशन में रोबोट यह नहीं समझ पाता कि कांच का एक गिलास उठाने में कितनी ताकत लगानी है। एनवीडिया की रिपोर्ट से चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने आए जब रोबोट की ट्रेनिंग में 20,000 घंटे के ‘फर्स्ट-पर्सन वीडियो’ (इंसान की नजर से शूट किए गए वीडियो) शामिल किए गए, तो उनकी सफलता की दर 50% से ज्यादा बढ़ गई। अब ये रोबोट टी-शर्ट की तह बनाना, ताश के पत्ते छांटना और बोतल का ढक्कन खोलने जैसे जटिल काम बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं। रोबोट की ट्रेनिंग के लिए अरबों घंटों के डेटा जरूरी रोबोट को काम सिखाने के लिए इंसानी वीडियो चाहिए। इसे ‘इगोसेंट्रिक डेटा’ या ‘ह्यूमन डेटा’ कहा जा रहा है। इसके लिए दुनियाभर के स्टार्टअप्स कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स रख रहे हैं। ये सिर पर कैमरा बांधकर रोजमर्रा के काम करना। कैलिफोर्निया की कंपनी माइक्रो1 के पास 71 देशों में लगभग 4,000 रोबोटिक्स ट्रेनर्स हैं। ये लोग हर माह 1.6 लाख घंटे से ज्यादा का वीडियो डेटा भेज रहे हैं। कंपनी के वीपी एरियन सादेघी का कहना है कि यह तो अभी शुरुआत है। रोबोट को पूरी ट्रेनिंग के लिए अरबों घंटों के डेटा की जरूरत होगी। डेटा कलेक्शन इंडस्ट्री की सबसे तेज ग्रोथ एशिया में रोबोटिक्स के क्षेत्र में डेटा कलेक्शन और लेबलिंग का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। मार्केट रिसर्च फर्म्स के मुताबिक, यह इंडस्ट्री सालाना औसतन 30% बढ़ रही है। 2030 तक यह ~92,600 करोड़ का बाजार होगा। सर्वाधिक ग्रोथ एशिया में देखी जा रही है। ऑब्जेक्टवेज जैसी कंपनियों के मुताबिक, अमेरिकी कंपनियां भारत जैसे देशों की तुलना में अमेरिकी घरों के डेटा के लिए 3 गुना वेतन दे रही हैं। ऑब्जेक्टवेज के संस्थापक रवि राजालिंगम कहते हैं, ‘रोबोट को जहां तैनात करना है, उसे वहीं का डेटा देना सटीक होता है।’ घरेलू काम में सुरक्षा से जुड़े लेकर सवाल गंभीर भले ही रोबोट फैक्ट्रियों में 99.9% सटीक काम कर रहे हैं, लेकिन घरों के अनिश्चित माहौल में उनकी सफलता दर 70-80% के बीच ही है। ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स’ के चेयरमैन अलेक्जेंडर वर्ल के मुताबिक यह व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए कम है। सबसे बड़ा खतरा सुरक्षा का है। राजालिंगम चेताते हैं, ‘यदि रोबोट गुड़िया और बच्चे के बीच फर्क नहीं कर पाया, तो नतीजे घातक हो सकते हैं। इसीलिए बच्चों के साथ रोबोट की टेस्टिंग नहीं हो रही, पर पालतू जानवरों के साथ डेटा कलेक्शन शुरू हो चुका है।’

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