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आगरा कॉलेज के सप्रू हॉस्टल परिसर में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले में साहित्य और शोध से जुड़ी चार पुस्तकों का लोकार्पण किया गया। इनमें शिक्षाविद्, लेखक एवं शोधकर्ता वेद त्रिपाठी की दो खंडों में प्रकाशित ‘भारत की औद्योगिक नीति के जनक : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी’ तथा डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ की तीन काव्य-कृतियां ‘त्रिपदा-छंद मणिमाला’, ‘घनाक्षरी वाटिका’ और ‘घनाक्षरी मेघमाला’ शामिल हैं। कार्यक्रम में साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़े लोग मौजूद रहे। औद्योगिक चिंतन और राष्ट्र निर्माण पर चर्चा वक्ताओं ने वेद त्रिपाठी की पुस्तक को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के औद्योगिक चिंतन और राष्ट्र निर्माण में योगदान के अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि शोध कार्यों के माध्यम से इतिहास और आर्थिक चिंतन से जुड़े विषयों को नई पीढ़ी तक तथ्यपरक रूप में पहुंचाया जा सकता है। छंद परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ ने कहा कि छंद भारतीय काव्य परंपरा की महत्वपूर्ण विधा है। नई पीढ़ी को छंदबद्ध कविता से जोड़ना साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम है। डॉ. विनोद कुमार दीक्षित और डॉ. राजेंद्र दवे ने कहा कि ऐसी कृतियां शास्त्रीय भाषा और आधुनिक पाठकों के बीच संवाद स्थापित करती हैं। समय इंडिया ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी चंद्र भूषण ने अतिथियों और लेखकों का स्वागत किया।
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राष्ट्रीय पुस्तक मेले में चार पुस्तकों का लोकार्पण:आगरा में साहित्य और शोध से जुड़ी कृतियों का हुआ विमोचन