राजीव कृष्ण बने यूपी के परमानेंट डीजीपी:प्रदेश सरकार ने जारी किया आदेश, चार साल बाद मिला स्थाई डीजीपी


यूपी को 4 साल के इंतजार के बाद परमानेंट डीजीपी मिल गया। मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण को यूपी का परमानेंट डीजीपी बना दिया गया है। दैनिक भास्कर ने शनिवार (30 मई) को ही उनके नाम को कन्फर्म कर दिया था। रविवार को प्रदेश सरकार ने इसका आदेश जारी कर दिया। UPSC की गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, वह कम से कम 2 साल तक यूपी के DGP रहेंगे। राजीव कृष्ण 1 जून, 2025 से कार्यवाहक डीजीपी की कमान संभाल रहे हैं। दरअसल, यूपी सरकार ने परमानेंट DGP को लेकर संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) को 19 IPS के नाम भेजे गए थे। इसे लेकर 26 मई को दिल्ली में आयोग की बैठक हुई। इस बैठक में यूपी के मुख्य सचिव एसपी गोयल और अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद भी शामिल हुए थे। बैठक में रेणुका मिश्रा, पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण का नाम डीजीपी के पैनल के लिए फाइनल किया गया। इसके बाद आयोग ने तीनों के नाम यूपी सरकार को भेज दिया। राजीव कृष्ण के बारे में जानिए राजीव कृष्ण 1991 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। मूलरूप से नोएडा के रहने वाले राजीव कृष्ण का जन्म 26 जून, 1969 को हुआ था। राजीव कृष्ण ऐसे घराने से संबंध रखते हैं, जहां एक दो नहीं 6 से ज्यादा अफसर हैं। उनकी पत्नी IRS अफसर हैं और मौजूदा समय में नोएडा में CBDT में डिप्टी सेक्रेटरी हैं। यहां-यहां रही तैनाती 1991 में आईपीएस बनने के बाद उनकी पहली तैनाती प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुई थी। इसके बाद बरेली, कानपुर, अलीगढ़ में एएसपी के तौर पर तैनात रहे। 10 मार्च, 1997 को इन्हें पहली बार जिले की कमान सौंपी गई और फिरोजाबाद के एसपी बने। इसके बाद वह इटावा, मथुरा, फतेहगढ़, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, आगरा, लखनऊ, बरेली के एसएसपी रहे। मायावती के शासनकाल में जब बड़े जिलों में एसएसपी के स्थान पर डीआईजी की तैनाती हो रही थी, उस समय इन्हें लखनऊ जिले का डीआईजी बनाया गया था। राजीव कृष्ण मेरठ रेंज के आईजी भी बने थे। 2012 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चले गए। सितंबर, 2017 में लौटे तो पहले पुलिस अकादमी मुरादाबाद में तैनाती दी गई। फिर 5 फरवरी, 2018 को इन्हें लखनऊ जोन का एडीजी बनाया गया। राजीव कृष्ण आगरा जोन में भी ढाई साल तक एडीजी जोन रहे थे। इसके बाद कार्यवाहक डीजीपी बनाए गए थे। राजीव कृष्ण का मजबूत बैक ग्राउंड है राजीव कृष्ण के परिवार में दो पीढ़ियों से सिविल सेवाओं (आईपीएस, आईआरएस) और राजनीति में प्रभावशाली उपस्थिति है। पत्नी मीनाक्षी सिंह नोएडा में CBDT में डिप्टी सेक्रेटरी हैं। सरोजनीनगर से विधायक राजेश्वर सिंह इनके साले हैं। राजेश्वर यूपी पुलिस के 1996 बैच के अफसर रहे हैं। बाद में वे प्रतिनियुक्ति पर प्रवर्तन निदेशालय चले गए और उसी कॉडर में मर्ज हो गए। 2022 के चुनाव से ठीक पहले राजेश्वर सिंह ने VRS लेकर राजनीति में कदम रखा। वे मौजूदा समय में लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से विधायक हैं। राजेश्वर की पत्नी लक्ष्मी सिंह गौतमबुद्धनगर की पुलिस आयुक्त हैं। इसके अलावा इनके ससुर भी डीआईजी रहे हैं। कम से कम 2 साल रहेंगे परमानेंट डीजीपी UPSC की गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, स्थाई डीजीपी बनने के बाद राजीव कृष्ण का कार्यकाल कम से कम 2 साल का होगा। हालांकि, उनका मूल सेवाकाल जून 2029 तक है। अगर वह अगले 2 साल स्थाई डीजीपी रहते हैं, तो एक साल के कार्यवाहक कार्यकाल को जोड़कर वे कुल 3 साल तक इस सबसे बड़े पद पर रहने वाले हाल के दिनों के इकलौते अफसर बन जाएंगे। UPSC पैनल ने भेजे थे ये 3 नाम यूपीएससी ने सीनियारिटी के आधार पर 3 अधिकारियों का पैनल यूपी सरकार को भेजा था। इनमें सबसे ऊपर रेणुका मिश्रा (1990 बैच) का नाम है। वे बीते 2 साल से बिना किसी चार्ज के हैं और डीजीपी कार्यालय में अटैच हैं। दूसरा नाम पीयूष आनंद (1991 बैच) का है। वह वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं और NDRF (नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) के डीजी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। तीसरा नाम राजीव कृष्ण (1991 बैच) का है। 4 साल से खाली था परमानेंट DGP का पद यूपी में बीते 4 साल से परमानेंट DGP का पद खाली था। 11 मई 2022 को तत्कालीन पूर्णकालिक DGP मुकुल गोयल को सरकार ने हटा दिया था, उसके बाद से प्रदेश को कार्यवाहक DGP ही मिलते रहे। मुकुल गोयल के हटने के बाद डीएस चौहान को कार्यवाहक DGP बनाया गया। इसके बाद दो महीने के लिए आरके विश्वकर्मा को कार्यवाहक DGP बनाया गया। आरके विश्वकर्मा के बाद विजय कुमार और विजय कुमार के बाद प्रशांत कुमार कार्यवाहक DGP बने। प्रशांत कुमार बीते साल 31 मई को रिटायर हो गए थे। फिर 1 जून, 2025 को राजीव कृष्ण को कार्यवाहक DGP बनाया गया।

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