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बरेली। 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने योग को नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे एक या दो क्रेडिट के पाठ्यक्रम के रूप में संचालित किया जाना चाहिए। कुलपति ने कहा कि योग को स्किल एन्हांसमेंट या ओपन इलेक्टिव विषय के रूप में शामिल किया जाए। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वस्थ जीवनशैली और आत्मानुशासन की भावना विकसित करना है। विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित योग शिविर में शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थियों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। कोच धर्मेंद्र कुमार ने मंत्रोच्चारण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ कराया और विभिन्न योगासनों के अभ्यास के साथ उनके शारीरिक और मानसिक लाभों की जानकारी दी। यह सत्र लगभग एक घंटे तक चला। प्रो. के.पी. सिंह ने कहा कि योग केवल एक दिवस का आयोजन नहीं, बल्कि जीवन जीने की निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने जोर दिया कि यदि इसे दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए तो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के साथ कार्यक्षमता और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है। उन्होंने नियमित प्रातःकालीन योग कक्षाएं शुरू करने का भी सुझाव दिया। इससे पहले विश्वविद्यालय ने एक माह तक संबद्ध महाविद्यालयों में योग शिविरों का आयोजन किया था। योग सप्ताह के तहत परिसर में भी नियमित अभ्यास कराया गया। 20 जून को बिथरी चैनपुर गांव में पदयात्रा, साइकिल रैली और योग शिविर के माध्यम से ग्रामीणों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम के दौरान पीजी डिप्लोमा इन योगा के विद्यार्थियों ने प्रो. ए.के. सिंह के निर्देशन में योग प्रदर्शन प्रस्तुत किया। अंत में डॉ. संदीप कुमार ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर कुलसचिव महेंद्र कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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'योग को पाठ्यक्रम से जोड़ा जाए':रुहेलखंड यूनिवर्सिटी के कुलपति ने कोर्स शुरू करने की दी सलाह