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सपा नेता आरपी यादव को आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद रायबरेली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस फैसले के दो दिन बाद, जहां पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सहानुभूति जताने के लिए दीवानी कोर्ट, जिला अस्पताल और जेल के चक्कर काटते रहे, वहीं जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव की अनुपस्थिति ने सबको चौंका दिया। इसी बीच, शहर के पांच स्थानों पर यादव समाज के नाम से होर्डिंग लगाए गए, जिनमें सपा जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव को ‘यादव समाज से बाहर’ करने की बात लिखी गई। जेल के बाहर जुटे कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सवाल उठाया कि संकट की इस घड़ी में संगठन का मुखिया साथ क्यों नहीं खड़ा है। बढ़ते विरोध को देखते हुए, जिलाध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने आज सोशल मीडिया पर अपनी सफाई पेश की। हालांकि, इस पर भी लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि यह सफाई पार्टी के आंतरिक दबाव में दी गई है या सोशल मीडिया पर हो रही किरकिरी से बचने के लिए। केवल जिलाध्यक्ष ही नहीं, बल्कि पार्टी में बड़े पदों पर बैठे अन्य नेताओं की दूरी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। कार्यकर्ता सवाल उठा रहे हैं कि क्या पार्टी केवल रैलियों और मंचों तक सीमित है और मुश्किल घड़ी में अपनों से किनारा करना कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ रहा है। यह भी एक बड़ा सवाल है कि क्या यह गुटबाजी का नतीजा है या सोची-समझी राजनीतिक दूरी। फिलहाल, जिलाध्यक्ष की सफाई के बाद भी कार्यकर्ताओं का असंतोष थमता नजर नहीं आ रहा है।
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यादव महासभा ने रायबरेली सपा जिलाध्यक्ष को 'यादव विरोधी' बताया:पूर्व नेता को आजीवन कारावास के बाद अनुपस्थिति पर विवाद