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ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने जलिस-ए-अज़ा के आयोजन को संबोधित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम, विश्वविद्यालय से जुड़े लोग और मोमिनीन मौजूद रहे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की ओर से मौलाना यासूब अब्बास ने अपने संबोधन में मजलिस-ए-अज़ा की अहमियत और कर्बला के महान बलिदान से मिलने वाली शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कर्बला केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, सत्य, न्याय, धैर्य और त्याग का ऐसा संदेश है, जो हर दौर के इंसान के लिए मार्गदर्शन का स्रोत है। इमाम हुसैन (अ.स) की कुर्बानी हमें अन्याय और अत्याचार के सामने सत्य एवं सिद्धांतों पर मजबूती के साथ कायम रहने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि हम कर्बला के पैगाम को अपने जीवन में उतारें और समाज में आपसी भाईचारा, एकता, इंसानियत तथा सद्भाव को मजबूत करें। मौलाना ने युवाओं से विशेष रूप से शिक्षा के साथ-साथ अच्छे अखलाक, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने की अपील की। मजलिस के दौरान कर्बला के शहीदों और विशेष रूप से हज़रत इमाम हुसैन (अ.स) की अज़ीम क़ुर्बानी का ज़िक्र किया गया। मजलिस में मौजूद लोगों ने पूरी अक़ीदत और एहतराम के साथ कार्यक्रम में शिरकत की। माहौल ग़मगीन रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अक़ीदत पेश किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम एवं मोमिनीन की मौजूदगी रही।
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मौलाना यासूब अब्बास ने जलिस-ए-अज़ा के आयोजन को संबोधित किया:कार्यक्रम में बड़ी संख्या में उलमा-ए-किराम एवं मोमिनीन की मौजूदगी रही