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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हरियाणा के मेवात जिले की साइबर क्राइम पुलिस द्वारा एक गृहिणी के बैंक खाते को बिना कारण बताए सीज करने के मामले में नोटिस जारी किया है। प्रयागराज की निवासी अनुश्री श्रीवास्तव, जो एक गृहिणी हैं, का भारतीय स्टेट बैंक की एम.एल.एन.एन.आई.टी. शाखा, तेलियरगंज, प्रयागराज में खाता है। 22 मार्च 2026 को हरियाणा के एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा उनके खाते में मात्र ₹1,000 जमा किए गए। इसके बाद 30 मार्च 2026 को उनके ऑनलाइन लेनदेन अचानक बंद हो गए। पीड़िता ने 10 अप्रैल 2026 को बैंक शाखा प्रबंधक को लिखित आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब वे बार-बार बैंक गईं, तो पता चला कि हरियाणा के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, मेवात, जिला नूंह द्वारा 09.अप्रैल .2026 के आदेश के तहत उनका पूरा बैंक खाता बिना किसी कारण के सीज कर दिया गया है। न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि बी.एन.एस.एस. की धारा 106(3) के तहत पुलिस को सीज की गई संपत्ति की सूचना तुरंत संबंधित मजिस्ट्रेट को देना अनिवार्य था, जो इस मामले में नहीं किया गया। पुलिस पूरे खाते को एकमुश्त सीज नहीं कर सकती। सिर्फ उतनी ही राशि रोकी जा सकती है जो अपराध की आय होने का संदेह हो।इस मामले में ₹1,000 की संदिग्ध राशि के लिए पूरे खाते को सीज करना अनुचित है। कोर्ट ने पुलिस से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी। कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक सहित विपक्षियों को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही साइबर क्राइम ब्रांच, मेवात के पुलिस अधीक्षक को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि बिना अपराध की राशि निर्दिष्ट किए पूरे खाते को क्यों सीज किया गया।
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मेवात के एसपी को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश:कोर्ट ने कहा- साइबर अपराध की जमा राशि के बजाय पूरे बैंक खाते को जब्त नहीं करें