मेनका गांधी के बयान पर जैन समाज में आक्रोश:कानूनी नोटिस के बाद देशव्यापी आंदोलन की घोषणा, 30 जून से अभियान


मुज़फ्फरनगर में पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के कथित विवादित बयान को लेकर जैन समाज में गहरा आक्रोश है। जैन संत परंपरा और पवित्र ‘पिच्छी’ पर की गई टिप्पणी के विरोध में समाज ने पहले कानूनी नोटिस भेजा और अब राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। इसी मुद्दे पर बुधवार शाम मुज़फ्फरनगर के जैन अतिथि भवन में जैन समाज की सर्वसमाज बैठक आयोजित की गई। इसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं और समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में मेनका गांधी के बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताया गया। जैन एकता मंच की युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव जैन ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से लगातार जैन समाज और जैन संतों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले जैन तीर्थ स्थलों को लेकर विवाद खड़े किए गए, फिर संतों पर हमले हुए और अब मेनका गांधी का ‘पिच्छी’ संबंधी बयान पूरे समाज का अपमान है। गौरव जैन ने स्पष्ट किया कि जैन संत जिस ‘पिच्छी’ का उपयोग करते हैं, वह मोर के स्वाभाविक रूप से झड़ चुके पंखों से बनाई जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाए बिना अहिंसा के सिद्धांत का पालन करना होता है। आंदोलन की रूपरेखा भी तय कर ली गई है। इसके तहत 30 जून को पूरे देश में सोशल मीडिया जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इसके बाद 7 जुलाई को देशभर के जैन मंदिरों के बाहर सुबह 9 बजे से 11 बजे तक दो घंटे का मौन आंदोलन होगा। मौन आंदोलन के बाद राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के नाम जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपे जाएंगे। यदि इसके बाद भी मेनका गांधी सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगती हैं, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। वहीं जैन समाज की ओर से मेनका गांधी को कानूनी नोटिस भेजने वाले अधिवक्ता निपुण जैन ने कहा कि 17 जून को दिल्ली स्थित लाल जैन मंदिर में आचार्य सौरभ सागर महाराज के प्रवास के दौरान मेनका गांधी ने जैन संतों और पिच्छी को लेकर तथ्यहीन आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा कि जैन समाज मोरों की हत्या का कभी समर्थन नहीं करता और पिच्छी केवल मोर द्वारा स्वाभाविक रूप से छोड़े गए पंखों से बनाई जाती है। उन्होंने कहा कि मेनका गांधी को समाज की वास्तविक परंपराओं की जानकारी लिए बिना ऐसा बयान नहीं देना चाहिए था। निपुण जैन ने कहा कि नोटिस के माध्यम से पहले उन्हें अपनी गलती सुधारने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का अवसर दिया गया है। यदि ऐसा नहीं होता तो समाज आगे कानूनी कार्रवाई और व्यापक आंदोलन दोनों करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जैन समाज लंबे समय से अपने धार्मिक स्थलों और संतों की सुरक्षा को लेकर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग करता रहा है। बैठक में जैन समाज के विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकमत होकर कहा कि यह केवल एक बयान का विरोध नहीं बल्कि जैन धर्म और उसकी परंपराओं के सम्मान की लड़ाई है।

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