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मऊ जनपद में खाद-बीज व्यापारियों का एक महत्वपूर्ण वार्षिक अधिवेशन बलिया मोड़ स्थित प्रसाद वाटिका में आयोजित किया गया। इस अधिवेशन में जिले भर से सैकड़ों व्यापारियों ने भाग लिया, जहां उन्होंने अपनी विभिन्न समस्याओं और सरकार की नई नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। अधिवेशन के दौरान व्यापारियों ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित सीड बिल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बिल विदेशी कंपनियों के दबाव में लाया जा रहा है, जिससे देश के कृषि क्षेत्र और स्थानीय व्यापारियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। व्यापारियों ने आशंका व्यक्त की कि इस बिल के माध्यम से देश का कृषि संबंधी डेटा विदेशी कंपनियों तक पहुंच सकता है, जो राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध है। व्यापारियों ने सीड बिल में तकनीकी खामी पाए जाने पर 25 से 30 लाख रुपये तक की भारी पेनाल्टी के प्रावधान पर भी चिंता जताई। उनका कहना था कि छोटे दुकानदारों के लिए इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना असंभव होगा, जिससे उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो सकता है। इसके अतिरिक्त, सरकार के ‘साथी ऐप’ को लेकर भी व्यापारियों ने सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था लागू नहीं हुई है और कई दुकानदार तकनीकी रूप से दक्ष नहीं हैं। ऐसे में ऐप आधारित प्रणाली उनके लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। किसानों के लिए फार्मर आईडी को अनिवार्य किए जाने पर भी व्यापारियों ने आपत्ति व्यक्त की। उनका तर्क था कि बटाई पर खेती करने वाले किसानों को खाद-बीज खरीदने में कठिनाई होगी, जिससे व्यापार भी प्रभावित होगा। साथ ही, IPMS पोर्टल पर हर जानकारी दर्ज करने की अनिवार्यता को भी व्यापारियों ने जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया बताया। अधिवेशन के समापन पर, व्यापारियों ने सरकार से अपनी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करने और ऐसी नीतियां बनाने की मांग की, जो छोटे व्यापारियों और किसानों दोनों के हितों की रक्षा करें।
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मऊ में व्यापारियों ने सीड बिल का विरोध किया:वार्षिक अधिवेशन में सरकारी नीतियों पर जताई चिंता