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‘निषाद पार्टी में विधायक के टिकट के 5 करोड़ रुपए लगेंगे। आधा अभी कर दें, आधा घोषणा से पहले कर देना। पिछली बार कहीं 7-8, तो कहीं 2-3 करोड़ था।’ यह कहना है यूपी की निषाद पार्टी के प्रदेश चुनाव प्रभारी का। विधानसभा चुनाव 3 महीने पहले कराने की सुगबुगाहट के बीच पॉलिटिकल पार्टियां अभी से टिकट बेचने में जुट गई हैं। पार्टी और सीट के अनुसार टिकट की कीमत तय की जा रही है। अगर पार्टी छोटी है और सीट पर उसकी पकड़ कमजोर है, तो 2 करोड़ रुपए में टिकट मिल सकता है। अगर पार्टी की स्थिति मजबूत है और सीट पर उसकी पकड़ भी है, तो 8 करोड़ से कम में बात नहीं बनेगी। टिकट बेचने वालों में 3 मंत्रियों की पार्टियों के पदाधिकारी हैं। इन्होंने टिकट के रेट पिछली बार के मुकाबले डेढ़ से दोगुना महंगे भी कर दिए हैं। वहीं, विपक्षी से जुड़े दल भी टिकट बेचने में पीछे नहीं है। दैनिक भास्कर की टीम ने टिकट के इस खेल को एक्सपोज करने के लिए 2 अंडरकवर रिपोर्टर को नेता और समाजसेवी बनाकर यूपी की 4 पॉलिटिकल पार्टियों में एंट्री कराई। यहां डेढ़ महीने तक सक्रिय रहे। जब टिकट मांगा, तो पदाधिकारियों ने रुपयों की डिमांड की। पढ़िए, पूरी इन्वेस्टिगेशन… हमने शुरुआत निषाद पार्टी से की। डॉ. संजय निषाद इसके अध्यक्ष हैं। वे योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। इनकी पार्टी भाजपा समर्थित है। इनका एक बेटा भी विधायक है। पार्टी का सारा काम परिवार के लोग ही देखते हैं। पार्टी में एंट्री के बाद हमने डॉ. संजय निषाद के साले रविंद्रमणि निषाद से पहचान बढ़ाई। रविंद्रमणि पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। अभी यूपी के चुनाव प्रभारी हैं और सरकार में पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य हैं। उन्होंने हमें हमीरपुर बुलाया। यहां टिकट की डील हुई – रिपोर्टर: हम फाजिलनगर (कुशीनगर जिला) की सीट चाहते हैं, क्योंकि आपका वोट है वहां।
रविंद्रमणि: आपने इच्छा जाहिर की है तो आपकी लड़ाई हम लड़ेंगे। अभी देखिए, हमारी-आपकी फर्स्ट टाइम मुलाकात हो रही है। जब आगे मुलाकात होगी तो बात की जाएगी। रिपोर्टर: लेकिन समय भी तो नहीं है।
रविंद्रमणि: अभी मुख्यमंत्रीजी भी बोले थे कि 15 दिसंबर तक आचार संहिता लग जाएगी। रिपोर्टर: आपसे निवेदन है कि हमें पता चल जाता तो हम लोग तैयारी शुरू कर देते।
रविंद्रमणि: पिछली बार तो हिसाब ऐसा था कि जो जिसको बोल दिया, वही हो गया। क्योंकि मंत्रीजी (डॉ. संजय निषाद) भी हमसे कहते थे कि तुम बोलो। लेकिन, इस बार चुनाव बड़े अलग लेवल का है। रिपोर्टर: हां, लड़ाई रहेगी।
रविंद्रमणि: हां, पार्टी भी उसी लेवल पर अपनी तैयारी करेगी। आप मानकर चलिए कि 5 करोड़ रुपए लगेंगे। इतने हो जाएंगे तो कोई इफ-बट भी नहीं रहेगा। रिपोर्टर: हम एकमुश्त कर दें तो हमारा एकदम कंफर्म हो जाएगा या आधा दे दें, क्या करना होगा?
रविंद्रमणि: ये तो आपके ऊपर है कि आधा पहले कर देते हैं, फिर आधा जब चुनाव का समय आएगा तो घोषणा से पहले कर देना। क्योंकि, पार्टी के दिमाग में ये न रहे कि घोषित कर दें और आप बदल जाएं। पिछली बार सब अंतिम समय में घोषित हुए थे तो सब एक-एक बार में ही हुआ था। रिपोर्टर: पिछली बार क्या रेट चला था?
रविंद्रमणि: वह सब अलग-अलग था। कहीं 7-8 करोड़ था, कहीं 2-3 करोड़ था, तो कहीं 5-6 करोड़ भी था। सब सीट वाइज था। रिपोर्टर: अच्छा, फाजिलनगर सीट पर भी 5 करोड़ ही करना होगा या कम होगा?
रविंद्रमणि: अब तो सभी जगह का लगभग एक ही रेट है। रिपोर्टर: ऐसा न हो कि कोई और डाॅक्टर साहब से मिल जाए तो मेरा कैंसिल हो जाए।
रविंद्रमणि: एक चीज है आप आने वाले छह महीने में देखेंगे, छह महीना ही है चुनाव में। कोई डाॅक्टर साहब से मिल ले तो भी आना पड़ेगा यहीं, हमारे पास। रिपोर्टर: हम लोगों को अगला कदम क्या उठाना चाहिए?
रविंद्रमणि: आप ऐसा कीजिए 7 तारीख को मंत्रीजी का जन्मदिन है। उस दिन बढ़िया इंप्रेशन बनाने के लिए गिफ्ट वगैरह लेकर आइए। उसी दिन मुलाकात हो जाएगी। हम आपको प्रजेंट कर देंगे। रिपोर्टर: गोल्ड वगैरह गिफ्ट कर दें?
रविंद्रमणि: यह तो आपके ऊपर है। हम कह रहे हैं कि फर्स्ट इंप्रेशन इज द लास्ट इंप्रेशन। इसके बाद हम आपको उनके साथ 10 मिनट के लिए बैठा देंगे। या तो उसी दिन या फिर अगले दिन। रिपोर्टर: ये सब तो ठीक है, हम आपके लिए क्या कर सकते हैं?
रविंद्रमणि: जो भी 5% या 10% हो जाएगा बढ़िया है। यानी यूपी की सत्ता में बैठी निषाद पार्टी टिकट बेच रही है। क्या सत्ता से जुड़ी बाकी पार्टियां भी ऐसा कर रही हैं? इसके जवाब के लिए हमने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) में कार्यकर्ता बनकर एंट्री की। इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर हैं। वे भी यूपी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। पार्टी में टिकट की डील के लिए राष्ट्रीय संगठन मंत्री सालिक यादव से कॉन्टैक्ट किया। उन्होंने गाजीपुर बुलाया। यहां हमारी डील हुई- रिपोर्टर: कितनी फंडिंग लगेगी?
सालिक यादव: हम पूछ लेब, बतिया लेब, रुपया कितना लागी, साफ बात है। रिपोर्टर: मोटा-मोटी तो बतावा जाए?
सालिक यादव: 7 तारीख को मंत्रीजी से भेंट होने दो, पैसा के लिए हर जगह बतियाना ठीक नहीं है। रिपोर्टर: आप टिकट दिलवाएंगे, आपके लिए जो करना है, करेंगे।
सालिक यादव: अब आपने दिमाग में डाल दिया है तो हम आपके वकील हो गए हैं। फैसला तो दूसरे के हाथ में है, लेकिन हम रहेंगे, बिना हमसे पूछे नहीं होगा। रिपोर्टर: आपका क्या अंदाजा है, कितना खर्च हो जाएगा?
सालिक यादव: अरे भाई 5-6 करोड़ रुपए में बात हो जाएगी, लेकिन अब अंदाजा देखना होगा। यह मुलाकात इस बात पर खत्म हुई कि सालिक यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर से पूछेंगे। इसके बाद फोन करके हमें बताएंगे कि टिकट का रेट क्या है? कुछ दिन बाद हमने सालिक यादव को कॉल किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेटे अरविंद राजभर से बात हुई है। फिर उन्होंने अरविंद से हुई बातचीत का खुलासा किया- सालिक यादव: अरविंद से बात हुई थी। रिपोर्टर: तो फंडिंग का क्या बताए?
सालिक यादव: वो बोले हैं कि भाजपा में 10-15 करोड़ रुपए चल रहे हैं। हम बोले कि भाजपा से क्या करना है? अपने यहां से मतलब है। रिपोर्टर: तो आप क्या बताए?
सालिक यादव: हम बता दिए कि इतना ही (5-6 करोड़ रुपए) हिसाब-किताब है। इसी में लड़ना और देना है। रिपोर्टर: तो उन्होंने कितना बताया?
सालिक यादव: हम यही बताए कि 10-12 करोड़ का बजट है। इसी में पार्टी को भी देना है। हम अरविंद का अंदाजा लेना चाहते थे, इसलिए उन्हें बताया कि 5-7 करोड़ हो जाएगा, लेकिन वे बताए कि इतने में नहीं होगा। रिपोर्टर: तो कितना तक मान लिया जाए, फाइनली?
सालिक यादव: हम आपसे कहे न कि 6 करोड़ रुपए, उतने में कर लेना है। अभी बहुत कुछ नहीं खोला है अरविंद ने। रिपोर्टर: तो वो कुछ बोले? सालिक यादव: हां, वो तो 7-8 करोड़ या 10-12 करोड़ की बात कर रहे थे। हम बोल दिए कि इतना नहीं करेंगे। हम यह भी बता दिए कि हमको आपसे एक नई गाड़ी मिलेगी। इस बात को छिपाना ठीक नहीं। कल को उन लोगों को पता चलेगा तो बुरा लगेगा। रिपोर्टर: मतलब 8 करोड़ तक हो जाएगा?
सालिक यादव: इससे कम में हो जाएगा, लेकिन उनकी मंशा 8 करोड़ रुपए तक है। रिपोर्टर: मतलब, पिछली बार 5 करोड़ था, इस बार 6 करोड़ का प्रपोजल दिए हैं आप।
सालिक यादव: हां, आप कहे थे, 6 करोड़ रुपए तक उनको बोल देना। रिपोर्टर: तो क्या बोले?
सालिक यादव: बोले- ठीक है, बाबूजी (ओमप्रकाश राजभर) से बतिया लीजिए। इसके बाद हमने अपना दल (सोनेलाल) के पदाधिकारियों से संपर्क किया। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल केंद्र में मंत्री हैं। पति आशीष पटेल यूपी सरकार में मंत्री हैं। उनका गृह जनपद चित्रकूट है। यहां के जिलाध्यक्ष हेमराज सिंह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आशीष पटेल के करीबी हैं। जब हमने हेमराज से कॉन्टैक्ट किया, तो उन्होंने हमें चित्रकूट में पार्टी कार्यालय बुलाया। यहां टिकट की डील की- रिपोर्टर: क्या करना होगा?
हेमराज सिंह: यहां तो 2 का चल रहा है। रिपोर्टर: दो करोड़ रुपए?
हेमराज सिंह: नहीं, पिछली बार मऊ के विधायकजी (अविनाश चंद्र द्विवेदी) 8 करोड़ रुपए दिए थे। अभी 2 लोगों में टक्कर चल रही है, ये बता रहा था। रिपोर्टर: विधायकजी 8 करोड़ रुपए दिए थे?
हेमराज सिंह: हां, वही अविनाश चंद्र द्विवेदी। रिपोर्टर: 8 करोड़ रुपए तो बहुत ज्यादा हो जाएंगे?
हेमराज सिंह: वे तो दिए ही थे, एक नरेंद्र पटेल गए थे, वो 7 करोड़ रुपए दिए थे। वे मऊ के थे। फिर इनको टिकट नहीं दिया। अविनाश जी को दे दिया। ये सीधे 8 करोड़ रुपए दिए थे। रिपोर्टर: आप एक मोटा-सा आंकड़ा दे देंगे, तो आसानी हो जाएगी।
हेमराज सिंह: कहा न, हमारे विधायकजी ने 8 करोड़ रुपए दिए थे। रिपोर्टर: मतलब हम लोग भी इतना ही इंतजाम करें?
हेमराज सिंह: अब इससे कम तो लेंगे नहीं। क्या विपक्ष से जुड़े दल भी टिकट बेच रहे हैं? इसके जवाब के लिए हमने जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) को आईडेंटिफाई किया। ये पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों के बीच गठबंधन था। इस पार्टी में घुसने के लिए हमने महासचिव उमेश सिंह चौहान से मुलाकात की। कुछ दिनों की मुलाकात और बातचीत के बाद उमेश सिंह चौहान को यकीन हो गया कि हमें वाकई टिकट की जरूरत है। तब उन्होंने गोरखपुर बुलाया। यहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय सिंह चौहान से उनके घर पर मिलाया। रिपोर्टर: हम लोगों की बात महासचिव उमेश सिंह चौहान से हुई थी, पडरौना या फाजिलनगर विधानसभा सीट पर। वहां ब्राह्मण वोट भी मिल जाएंगे।
संजय सिंह: पडरौना आसान रहेगी। पडरौना मैनेज की जा सकती है। फाजिलनगर की बहुत गारंटी नहीं ले सकता हूं, क्योंकि फाजिलनगर पर अखिलेश जी का कुछ व्यक्तिगत इमोशनल लगाव है। वो सीट मिल भी जाएगी, लेकिन अखिलेश जी काे तकलीफ होगी, क्योंकि वह इमोशनल लीडर हैं। रिपोर्टर: ठीक है, जहां आप कहें जैसा कहें।
संजय सिंह: देखिए, अगर आप जुड़ना चाहते हैं तो आपका लक्ष्य विधायक बनना है। मेरा लक्ष्य है मेरा दल खड़ा करना। 14 सितंबर की बनारस की रैली आते-आते पूर्वांचल की पूरी हवा बदल दूंगा। रिपोर्टर: पिछली बार हमारी डॉक्टर साहब (महासचिव उमेश चौहान) से बात हुई थी। उन्होंने 1 Cr कहा था।
संजय सिंह: अभी इतना कर देंगे तो हमें राहत मिल जाएगी। रिपोर्टर: आगे फिर क्या करना होगा? हमको प्रदेश स्तर का पदाधिकारी भी बनाने की बात हुई थी।
संजय सिंह: हां, वह तो हो जाएगा। रिपोर्टर: दूसरा हमको चुनाव लड़ना है तो हमारा कितना खर्च आएगा? संजय सिंह: (महासचिव की ओर देखते हुए) आप और डाॅक्टर साहब बैठकर बात कर लीजिएगा। रिपोर्टर: आप सर्वेसर्वा, पार्टी के मुखिया हैं, इसीलिए आपसे बात कर रहे हैं।
संजय सिंह: आप पडरौना से शुरुआत करो और निश्चिंत रहो। चाहे सपा से गठबंधन हो या भाजपा से, वह सीट हमारे पास ही रहेगी। एक चीज बताएं- 1 Cr अभी कर दीजिए और जब बनारस में हमारी रैली हो 14 सितंबर को, क्योंकि वह प्राइम मिनिस्टर का क्षेत्र है। वहां की हर रिपोर्टिंग प्राइम मिनिस्टर कार्यालय जाती है। उस रैली में आप हमारी एक-आध करोड़ की व्यवस्था बना दीजिए। रिपोर्टर: एक या डेढ़ करोड़, कितना?
संजय सिंह: 1 करोड़ की व्यवस्था कर दीजिए। रिपोर्टर: उसके बाद फिर?
संजय सिंह: उसके बाद जो आपकी खुशी रहेगी, टिकट आपका कंफर्म रहेगा। रिपोर्टर: इसका मतलब 2 करोड़ रुपए?
संजय सिंह: (हां में सिर हिलाते हुए) 2 Cr, बहुत मजबूरी में फंसा तो आपको याद करूंगा। अब जानिए, इस तरह टिकट की डील गलत क्यों है – टिकट डील के पार्ट-2 में कल पढ़िए एक नेशनल पॉलिटिकल पार्टी यूपी में विधायक का टिकट देने और सरकार बनने पर मंत्री पद देने के लिए कितने रुपए की डिमांड कर रही है…? ————————– ये खबर भी पढ़ें… ‘रिश्वत लेकर साहब को नहीं देंगे तो बाथरूम धोना पड़ेगा’, यूपी पुलिस का जवान बोला-जैसा पैसा, वैसी पोस्टिंग पुलिस विभाग में कोई सिपाही नहीं चाहता- रिश्वतखोरी में लिप्त हो, लेकिन अफसर 10 रुपए देकर भिंडी लाने भेजेंगे और भिंडी है- 12 रुपए की। फिर रास्ते में फोन पर बोलेंगे कि कद्दू भी लाना। अगर नहीं लाएंगे तो हटा दिए जाएंगे, दिक्कत आने लगेगी। बाथरूम धोना पड़ेगा। बाथरूम नहीं धोना है तो साहब की सारी व्यवस्था कीजिए। यह कहना है यूपी पुलिस के एक सिपाही का, जो अपने डिपार्टमेंट में घूसखोरी के राज खोल रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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