भारत विकास परिषद का 64वां स्थापना दिवस:लखनऊ में सेवा कार्यों पर चर्चा, चैतन्य कौशिक ने परिषद के सेवा कार्यों की सराहना


भारत विकास परिषद, अवध प्रांत, उत्तर मध्य क्षेत्र-2 ने शुक्रवार को लखनऊ में अपना 64वां स्थापना दिवस मनाया। यह कार्यक्रम इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स सभागार, कैसरबाग में आयोजित किया गया, जिसमें परिषद के सदस्य, पदाधिकारी और शहर के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत प्रांतीय अध्यक्ष देवेंद्र स्वरूप शुक्ला ने मुख्य और मंचासीन अतिथियों का परिचय कराकर की। राष्ट्रीय अतिरिक्त महासचिव मुकेश जैन ने परिषद की स्थापना और उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि परिषद की स्थापना 10 जुलाई 1963 को दिल्ली में डॉ. सूरज प्रकाश और लाला हंसराज गुप्ता के प्रयासों से हुई थी। परिषद का लक्ष्य संस्कारित भारत का निर्माण करना मुकेश जैन ने आगे बताया कि आज परिषद देशभर के 80 प्रांतों और 10 क्षेत्रों में ‘संपर्क, सहयोग, संस्कार, सेवा और समर्पण’ के पांच सूत्रों को आधार बनाकर कार्य कर रही है। परिषद का मुख्य लक्ष्य स्वस्थ, समर्थ और संस्कारित भारत का निर्माण करना है। परिषद विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य सेवाएं, संस्कार शिविर, पर्यावरण संरक्षण अभियान, परिवार संस्कार, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता जैसे कई सामाजिक कार्य संचालित कर रही है। कोटा में परिषद का 350 बेड का अस्पताल कम खर्च में बाईपास सर्जरी सहित कई उपचार उपलब्ध करा रहा है। इसके अलावा , परिषद वर्ष 1967 से राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है। ‘भारत को जानो’ प्रतियोगिता में हर साल लगभग 10 हजार स्कूलों के दो लाख से अधिक विद्यार्थी भाग लेते हैं, जिससे छात्रों में देश के प्रति जागरूकता बढ़ती है। सेवा की भावना अपनाने का आह्वान मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता चैतन्य कौशिक ने परिषद के सेवा कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से किए गए सत्कर्म ही व्यक्ति को समाज में अमर बनाते हैं। गीता का उल्लेख करते हुए उन्होंने लोगों से सेवा और दान की भावना अपनाने का आह्वान किया और कहा, ‘देवता बनो, लेवता मत बनो। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. आनंद मिश्रा उपस्थित रहे। इस अवसर पर 75 वर्ष की आयु पूरी कर चुके परिषद के वरिष्ठ सदस्यों को सम्मानित भी किया गया।

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