पूर्व आईपीएस प्रेम प्रकाश बोले- ललिता हत्याकांड पुलिस की देन:11 मई को युवती जता चुकी थी जान का खतरा तो कार्रवाई क्यों नहीं की


मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड में पुलिस की खामिया उजागर होने लगी हैं। प्रशासन चाहे जो दावे करे लेकिन हकीकत यही है कि अगर रोहटा पुलिस गंभीरता दिखाती तो ललिता गौतम को बचाया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शुक्रवार को मेरठ आए पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रेम प्रकाश का भी यही मानना है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने शुरु से ही मामले में ढिलाई बरती। नतीजा यह हुआ कि पीड़ित परिवार का भरोसा टूटा और उसे सड़क पर उतरना पड़ा। शुक्रवार को सिवाया टोल प्लाजा पर पीड़ित परिवार से वार्ता के बाद बाहर निकले पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रेम प्रकाश ने दैनिक भास्कर से वार्ता की। प्रेम प्रकाश ने कहा कि 11 मई को ललिता गौतम ने अपनी हत्या का अंदेशा जाहिर किया था। यदि पुलिस इसका संज्ञान ले लेती तो शायद ललिता जिंदा होती। इसके बाद कुछ ऐसे स्टेटमेंट सामने आ गए, जिन्होंने पूरे मामले की दिशा बदलने और परिवार की इज्जत को प्रभावित करने का काम किया जो नहीं होना चाहिए था। विवेचक भी नहीं दे पाए सवालों के जवाब
सिवाया टोल प्लाजा पर पीड़ित परिवार से वार्ता के बाद चंद्रशेखर आजाद व पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रेम प्रकाश ने कानूनी प्रक्रिया को भी जाना। बाकायदा मुकदमे के विवेचक को बुलाया गया लेकिन वह पूर्व आईपीएस के सवालों का संतुष्टि भरा जवाब नहीं दे सके। इसके बाद विवेचक को संवेदनशीलता के साथ काम करने व दोषियों को कतई ना बख्शे जाने के निर्देश दिए गए। प्रेम प्रकाश बोले- अपराधी की कोई जाति नहीं
वार्ता के दौरान प्रेम प्रकाश की तरफ से कई सवाल किए गए लेकिन कोई उचित जवाब नहीं मिला। उन्होंने हिदायत दी कि पुलिस को निष्पक्ष भाव से काम करना चाहिए। अपराधी की कोई जाति नहीं होती है। सच्चाई को सामने लाने का काम पुलिस का है। अफसरों को डिमांड से भी अवगत कराया
प्रेम प्रकाश ने कहा कि इस तरह की वारदात में कुछ गाइड लाइन पहले से जारी हैं। मसलन पीड़ित परिवार की मदद के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कई अन्य बिंदुओं पर चर्चा हुई है। शस्त्र लाइसेंस इनमें प्रमुख है। इसके अलावा वह युवती अपने परिवार में सर्वाधिक पढ़ी लिखी थी। इसलिए उसके परिवार को नौकरी का लाभ भी मिले। पूर्व आईपीएस बोले- एसएसपी को नहीं जाना था
प्रेम प्रकाश ने कहा कि यह अपने आप में चौकाने वाली बात है कि एसएसपी मौके पर पहुंचे। जबकि पहले से कई एसपी वहां इन लोगों से वार्ता कर रहे थे। संभवत: एसएसपी अविनाश पांडेय को गलत चीजे बताई गईं। जिस कारण वह इतना आक्रोशित हो गए। जबकि ट्रेनिंग में इस तरह की स्थिति से निपटना बताया जाता है। डीएम-एसएसपी से करी मुलाकात
सिवाया टोल पर परिजनों से वार्ता के बाद उन्हें घर भेज दिया गया। इसके बाद चंद्रशेखर ने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं को सबोधित किया तो पूर्व एडीजी पुलिस प्रेम प्रकाश एक प्रतिनिधिमंडल को साथ लेकर जिलाधिकारी डा. वीके सिंह और एसएसपी अविनाश पांडेय से वार्ता के लिए कलेक्ट्रेट पहुंच गए। गांव में सुरक्षा की उठाई गई मांग
प्रेम प्रकाश ने बताया कि इस पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। दो साल पहले भी इसी परिवार का कोई विवाद हुआ लेकिन समझौता करा दिया गया। अब फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके अनुसार आगे की कार्रवाई उच्चाधिकारियों की देखरेख में शुरु होगी। गांव में सुरक्षा का मुद्दा भी इस दौरान उठाया गया।

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