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भाजपा ने कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का वीडियो शेयर कर सोनिया गांधी पर पूरे वंदे मातरम के गायन पर आपत्ति जताने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने आरोप को खारिज करते हुए कहा कि सोनिया गांधी केवल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं, क्योंकि वे काफी देर से खड़े थे। बीजेपी नेताओं ने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने वंदे मातरम के पूरे संस्करण का गायन रोकने की कोशिश की। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि शनिवार को इंदिरा भवन में वंदे मातरम का पूरा संस्करण गाया गया और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई। बीजेपी ने वीडियो शेयर कर लगाया आरोप बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष ने X पर कांग्रेस के कार्यक्रम का वीडियो शेयर किया। उन्होंने लिखा, “मां, बेटा और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूरे वंदे मातरम के गायन से परेशान दिख रहे हैं।” उन्होंने कहा, “1947 से पहले और 1947 के बाद भी कुछ मानसिकताएं कभी नहीं बदलतीं।” बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा, “स्वतंत्रता दिवस पर आज जो दृश्य सामने आया है, वह बेहद शर्मनाक है। भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के गायन के दौरान सोनिया गांधी की आपत्ति और कांग्रेस कार्यकर्ताओं से यह पूछना कि इसे क्यों बजाया जा रहा है, कांग्रेस की मानसिकता दिखाता है।” अग्रवाल ने कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम, राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का ऐतिहासिक प्रतीक है। उन्होंने पूछा, “क्या यह वही कांग्रेस है, जो देश के स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर अपना दावा करती है?” अग्रवाल ने आरोप लगाया कि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस का रवैया लोगों को पार्टी की “इमरजेंसी वाली मानसिकता” की याद दिलाता है। उन्होंने कहा, “देश के लोगों ने इस मानसिकता को खारिज कर दिया है और आगे भी खारिज करते रहेंगे।” कांग्रेस बोली- खड़गे के लिए कुर्सी मांग रही थीं सोनिया विवाद पर जयराम रमेश ने कहा कि 28 अक्टूबर 1937 को कलकत्ता में महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, जवाहरलाल नेहरू, गोविंद बल्लभ पंत और सी राजगोपालाचारी की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी। उन्होंने कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर तय किया गया था कि कांग्रेस अधिवेशनों में वंदे मातरम की शुरुआती पंक्तियां गाई जाएंगी। रमेश के मुताबिक, टैगोर ने नेहरू और बोस को सलाह दी थी कि वंदे मातरम के शुरुआती कुछ पैराग्राफ का इस्तेमाल किया जाए। रमेश ने कहा, “तब से हम हर अधिवेशन में उन्हीं पंक्तियों को गाते आ रहे हैं। हमारा सेवा दल इसे गाता है और हमारे कार्यकर्ता भी इसे गाते हैं। इसे लेकर कोई विवाद नहीं है।” उन्होंने कहा कि शनिवार को राष्ट्रीय गीत का पूरा संस्करण गाया गया। रमेश ने बीजेपी नेताओं के आरोप को साफ तौर पर खारिज करते हुए कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष काफी देर से खड़े थे, इसलिए सोनियाजी उनके लिए कुर्सी मांग रही थीं।” रमेश ने कहा, “इस मुद्दे पर संसद में 16 घंटे चर्चा हुई। हमने अपने विचार रखे। मैंने इससे जुड़ा पूरा इतिहास बताया, जिसके बारे में प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जानकारी नहीं थी। मैंने सांसदों को बताया कि वंदे मातरम को लेकर फैसला किस संदर्भ में लिया गया था।” उन्होंने कहा, “आज इंदिरा भवन में पूरा संस्करण गाया गया। इसे लेकर विवाद का कोई सवाल ही नहीं है।” बीजेपी नेताओं ने वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगाया बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने वोटबैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के लिए वंदे मातरम के पूरे संस्करण का गायन रोकने की कोशिश की। भंडारी ने X पर पोस्ट में कहा, “कांग्रेस दिमागी नक्सल मानसिकता से जूझ रही है।” बीजेपी प्रवक्ता आरपी सिंह ने सोनिया गांधी पर तंज कसते हुए पूछा, “एंटोनियो माइनो जी वंदे मातरम से इतनी नफरत क्यों करती हैं? जब वंदे मातरम गाया जा रहा था, तब एंटोनियो माइनो जी कथित तौर पर इतनी नाराज हो गईं कि उन्होंने कथित तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं से इसे रोकने के लिए कहा। वंदे मातरम से इतनी नफरत क्यों?” राष्ट्रीय गीत के अपमान पर कानून में सजा का प्रावधान पिछले महीने संसद ने ऐसा बिल पास किया, जिसमें राष्ट्रीय गीत का अपमान करना दंडनीय अपराध बनाया गया है। ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ को राज्यसभा से मंजूरी मिलने के एक दिन बाद 30 जुलाई को लोकसभा ने ध्वनिमत से पास किया था। इस कानून के तहत वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ के बराबर दर्जा दिया गया है। बीजेपी के आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार कांग्रेस मुख्यालय में पूरा वंदे मातरम गाया गया। मालवीय ने X पर पोस्ट में दावा किया, “वंदे मातरम की शुरुआती पंक्तियां गाए जाने के बाद सोनिया गांधी नाराज हो गईं और उन्होंने इसे पूरा गाने के बजाय रोकने के लिए कहा। राहुल गांधी भी इसे खत्म करने का संकेत देते दिखे। उन्हें इसे जारी रहने देने के लिए कहा गया।” उन्होंने कहा, “संदेश साफ था कि नए कानूनी ढांचे के तहत पूरे राष्ट्रीय गीत का सम्मान करना होगा। जानबूझकर इसमें रुकावट डालने या इसे बाधित करने पर गंभीर नतीजे हो सकते हैं। आखिरकार वे मान गए और वंदे मातरम पूरा गाया गया।” मालवीय ने आरोप लगाया कि दशकों से “गांधी परिवार” और कांग्रेस ने सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वास से भरे और सभ्यतागत जड़ों वाले भारत की सोच के साथ असहज रिश्ता दिखाया है। बीजेपी नेता ने कहा, “विडंबना यह है कि स्वतंत्रता दिवस पर यही असहजता सामने आ गई।”
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भाजपा का आरोप-सोनिया ने वंदे मातरम रोकने की कोशिश की:वीडियो शेयर कर कहा- गायन के दौरान असहज दिखीं; कांग्रेस बोली- कुर्सी मांग रही थीं