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मुजफ्फरनगर में मानवता और सेवा की मिसाल बन चुकीं शालू सैनी ने एक बार फिर एक बेसहारा मृतक के प्रति बेटी का फर्ज निभाया है। रेलवे स्टेशन और साईं बाबा मंदिर के पास रहने वाले एक अज्ञात बुजुर्ग के निधन के बाद जब कोई परिजन सामने नहीं आया, तो शालू सैनी ने खुद वारिस बनकर पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। जानकारी के अनुसार, साईं बाबा मंदिर के सामने स्थित शालू सैनी के फास्ट फूड स्टॉल के आसपास ही यह बुजुर्ग पिछले कई दिनों से रह रहे थे और मांगकर अपना गुजारा करते थे। अचानक उनके निधन के बाद पुलिस और आसपास के लोगों ने उनकी पहचान और परिजनों की तलाश की, लेकिन उनका कोई वारिस नहीं मिला। इसके बाद शालू सैनी ने आगे बढ़कर बुजुर्ग को अपने परिवार का हिस्सा माना और उनकी अंतिम यात्रा की पूरी जिम्मेदारी उठाई। अंतिम संस्कार के बाद शालू सैनी ने कहा कि बेसहारा लोगों की सेवा करना उनके लिए कोई काम नहीं, बल्कि उनका धर्म, कर्म और जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जिनका इस दुनिया में कोई सहारा नहीं होता, उन्हें सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई देना उनका संकल्प है। महाकाल की कृपा से वह आगे भी इसी तरह लावारिस और बेसहारा मृतकों की अंतिम यात्रा में बेटी की भूमिका निभाती रहेंगी। 6000 से अधिक शवों का कर चुकी हैं अंतिम संस्कार गौरतलब है कि शालू सैनी पिछले कई वर्षों से लावारिस और बेसहारा शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार करती आ रही हैं। उनके अनुसार, वह अब तक 6000 से अधिक मृतकों को सम्मानजनक अंतिम विदाई दे चुकी हैं। समाज सेवा और मानवीय संवेदना के इस पुनीत कार्य के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ पुलिस-प्रशासन भी उनकी जमकर सराहना करता है।
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बेसहारा बुजुर्ग का अंतिम संस्कार:शालू सैनी ने फिर पेश की मिशाल; 6 हजार लावारिस शवों को दे चुकी विदाई