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बुलंदशहर में वर्ष 2010 में हुई एक हत्या के मामले में अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास और 55 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला एडीजे-06 न्यायालय के न्यायाधीश संजय कुमार यादव द्वितीय ने सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 23 जनवरी 2010 को थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के ऊपरकोट बजरिया में हुई थी। सादाब पुत्र शाहबुद्दीन ने मोहम्मद इरशाद के भाई मोहसिन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस संबंध में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा संख्या 66/2010 भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 302, 149, 504 और 506 के तहत दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने आरोपी सादाब के कब्जे से एक अवैध तमंचा और कारतूस भी बरामद किया। इसके लिए उसके खिलाफ शस्त्र अधिनियम की धारा 3/25 के तहत अलग से मुकदमा संख्या 133/2010 दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच पूरी कर 29 अप्रैल 2010 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध आरोप सिद्ध किए। सभी तथ्यों और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने सादाब को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 55 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी अधिवक्ता वीरपाल सिंह ने प्रभावी पैरवी की।
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बुलंदशहर में 2010 की हत्या के मामले में सजा:दोषी को आजीवन कारावास, 55 हजार रुपये का जुर्माना