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सहारनपुर में जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक और देवबंद के जाने-माने देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने बिना महरम (करीबी पुरुष रिश्तेदार) के हज पर जाने वाली महिलाओं के सफर पर एतराज जताया है। उन्होंने इस मुद्दे को शरई (इस्लामी) नजरिए से अहम बताते हुए सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को जारी एक वीडियो बयान में मौलाना कारी इसहाक गोरा ने कहा कि हज 2026 का सफर शुरू हो चुका है और बड़ी संख्या में हाजी मुकद्दस सरजमीन पर पहुंच चुके हैं। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी काफी महिलाएं बिना महरम के हज के लिए जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब सफर ही शरीयत के अहकाम के खिलाफ हो, तो ऐसे हज की क़ुबूलियत पर सवाल उठता है। उन्होंने आगे कहा कि हज जैसी बड़ी इबादत के लिए रवाना होने से पहले हर मुसलमान, खासकर महिलाओं को शरीयत की हिदायतों को समझना चाहिए। उन्होंने ये भी सवाल किया कि क्या हज पर जाने वाली महिलाओं ने इस मसले पर किसी मुफ्ती या आलिम-ए-दीन से सलाह ली है और क्या उन्होंने अपने सफर के शरई पहलू पर गौर किया है। मौलाना ने कहा कि इस्लाम में इबादत केवल नीयत का नाम नहीं है, बल्कि उसे सही तरीके से अदा करना भी उतना ही जरूरी है। अगर कोई अमल शरीयत के दायरे से बाहर हो जाए, तो उसकी कुबूलियत पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में सहूलतें और बेहतर इंतजाम होने के बावजूद शरीयत के उसूलों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। लोगों को चाहिए कि वे जज्बात या समाजी रुझानों के बजाय दीन की समझ और इल्म के आधार पर फैसले लें। अंत में मौलाना कारी इसहाक गोरा ने सभी हाजियों के लिए दुआ की कि अल्लाह उनका सफर आसान करे, उनकी इबादतों को क़ुबूल फरमाए और उन्हें सही समझ और अमल की तौफीक अता करें।
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बिना महरम हज पर महिलाओं के सफर पर मौलाना एतराज:सहारनपुर में मौलाना बोले-ये गैर-शरई, जाने से पहले मुफ्ती या आलिम-ए-दीन की ले सलाह