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इटावा जिले के विद्युत वितरण खंड प्रथम के (पदेन) अधिशासी अभियंता, लेखाधिकारी और एक फर्म के ठेकेदार के खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेराफेरी के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 468 के तहत मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई शिकायतकर्ता एडवोकेट अजय द्विवेदी की शिकायत और न्यायालय के आदेश के बाद हुई है। शिकायतकर्ता अजय द्विवेदी का कहना है कि विद्युत विभाग में यह हेराफेरी वर्ष 2016 से लगातार होने की बात एफआईआर में सामने आई है। उनके मुताबिक कई वर्षों में लाखों रुपये की अनियमितता की गई। यह हेराफेरी करोड़ों में भी पहुंच सकती है। हालांकि मुकदमा फिलहाल अधिशासी अभियंता, लेखाधिकारी और फर्म के ठेकेदार के खिलाफ दर्ज हुआ है। इस पूरे मामले में इस फर्म के ठेकेदार के साथ कौन कौन शामिल थे उनके नाम की जांच अब पुलिस करेगी। कागजों पर काम भुगतान का आरोप शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कई ऐसे कार्यों के पैकेज स्वीकृत किए गए, जिनका काम धरातल पर नहीं हुआ, लेकिन कागजों में काम पूरा दिखाकर भुगतान कर दिया गया। उनका आरोप है कि कमीशन के आधार पर बिना काम कराए भुगतान किए गए। शिकायतकर्ता के मुताबिक ऐसे कई कार्यों की जानकारी सामने आई है। आरटीआई से जानकारी मिलने का दावा अजय द्विवेदी के मुताबिक उन्होंने आरटीआई के माध्यम से विभाग से जुड़ी जानकारी हासिल की। उनका दावा है कि दस्तावेजों से लाखों रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया। इस संबंध में उपलब्ध साक्ष्य पुलिस और न्यायालय के सामने प्रस्तुत किए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फर्जी रजिस्ट्रेशन और कागजी कार्यवाही के जरिए लंबे समय से सरकारी धन के दुरुपयोग का खेल चल रहा है।
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बिजली विभाग में लाखों की हेराफेरी, 3 पर केस:कोर्ट के आदेश पर अधिशासी अभियंता, लेखाधिकारी और ठेकेदार पर धोखाधड़ी का केस