बिजली गिरने की सटीक जानकारी मिलना मुश्किल:आस-पास आप्टिकल सेंसर न होने से आएगी समस्या; मलबे के सैंपल की होगी जांच


प्ती नदी के तट पर गुंबदनुमा छत ढहने से 2 अधिवक्ताओं की मौत के मामले में कई तरह से बिजली गिरने की सत्यता परखी जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर प्रथम दृष्टया यह माना गया है कि गुंबदनुमा छत बिजली गिरने के कारण गिरी। यही कारण है कि दोनों मृत अधिवक्ताओं के परिजनों को आपदा विभाग की ओर से 4-4 लाख रुपये की आर्थिक मदद भी की गई है। लेकिन गुणवत्ता पर सवाल उठने के बाद वैज्ञानिक तरीके से यह पुष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि बिजली गिरने की सच्चाई क्या है। इसके लिए इसरो से रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन घटना स्थल के आस-पास आप्टिकल सेंसर न होने से सटीक रिपोर्ट मिलना मुश्किल है। वैकल्पिक मार्ग अपनाते हुए प्रशासन ने मलबे का सैंपल भी लैब को भेजा है, जहां जांच के बाद बिजली गिरने की सत्यता पुष्ट होगी। गोरखपुर के अधिवक्ता विनोद तिवारी की माता का निधन हो गया था। 6 सितंबर को उनका अंतिम संस्कार राप्ती नदी के तट पर निर्मित गुरु गोरक्षनाथ घाट पर हो रहा था। उसमें शामिल होने के लिए विनोद के साथी अधिवक्ता आलोक अस्थाना व संजय सिंह भी गए थे। अचानक वहां बारिश शुरू हो गई। जिससे बचने के लिए वे उसी गुंबदनुमा छज्जे के नीचे जाकर बैठ गए। थोड़ी देर बाद बारिश तेज हो गई। बताया जा रहा है कि कुछ ही देर बाद छत भरभरा कर गिर गई, जिसके नीचे दबकर दोनों अधिवक्ता बुरी तरह घायल हो गए। बाद में इलाज के दौरान दोनों लोगों की मृत्यु हो गई। प्रथम दृष्टया बिजली गिरने की बात प्रसारित हुई मौके पर मौजूद लोगों ने इस बात का दावा किया था कि बिजली की कड़कने की आवाज सुनी थी और फिर गुंबदनुमा छत गिरते देखी। लोगों के बयान के आधार पर भी प्रशासन ने प्रथम दृष्टया बिजली गिरने की बात को ही माना। इसी आधार पर दोनों दिवंगत अधिवक्ताओं के परिजनों को आपदा विभाग से आर्थिक सहायता भी दी गई है। लेकिन कुछ अधिवक्ता बिजली गिरने की बात पर सवाल उठाने लगे। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता खराब होने के नाते दुर्घटना होने का दावा किया। प्रशासन ने उनकी इस बात को भी गंभीरता से लिया और 5 साल पहले निर्माण कराने वाली फर्म मेसर्स अनीता सिंह, दो जेई एवं एक एई पर एफआईआर दर्ज की। सभी को हिरासत में लेकर पलिस पूछताछ कर रही है।
वैज्ञानिक तरीके से कारण ढूंढने की कोशिश
इस मामले में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू होने के बाद प्रशासन ने बिजली गिरी या नहीं गिरी, इस बात की पुष्टि वैज्ञानिक तरीके से कराने का निर्णय लिया। इसके लिए रिपोर्ट मंगाई जा रही है। उस स्थान पर लगे आप्टिकल सेंसर आकाशीय बिजली चमकने पर निकलने वाली रेडियो तरंगों (VLF/VHF सिग्नल) को पकड़ते हैं। कई सेंसर एक साथ बिजली गिरने के समय का मिलान करते हैं। इससे बिल्कुल सटीक जगह (अक्षांश और देशांतर) का पता चलता है। इसी आधार पर बिजली गिरने की पुष्टि होगी। जहां यह घटना हुई है, वहां कोई सेंसर नहीं है। जिससे वैज्ञानिक तरीके से इसे पुष्ट करना आसान नहीं होगा। सेंसर न लगे होने से सेटेलाइट के जरिए बिजली गिरने की पुष्टि के प्रयास को धक्का लगा है। बताया जा रहा है कि यहां से लगभग 20 किलोमीटर दूर यह सेंसर लगा है लेकिन उससे यहां की रिपोर्ट तैयार नहीं की जा सकती। यही कारण है कि इसके साथ ही प्रशासन गुंबदनुमा छत के मलबे भी सैंपल के तौर पर तकनीकी संस्थान को भेजा जा चुका है। इसकी जांच से भी बिजली गिरने से जुड़ी सटीक जानकारी मिलेगी। इधर डीएम की ओर से गठित की गई कमेटी भी अपनी जांच लगभग पूरी कर चुकी है।

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